Saturday, September 4, 2010

Charity ईद की नमाज़ से पहले अदा करना चाहिए फ़ितरा Ayaz Ahmad

रमज़ानुल मुबारक का महीना अल्लाह की ईबादत (उपासना) और इताअत (समर्पण) का महीना है इस महीने मे हर अमल (अच्छे काम) पर सवाब (पुण्य) बढ़ा दिया जाता है ।रोज़े का बदला अल्लाह खुद इनायत करता है । रोज़ेदार कितनी भी एहतयात करें तब भी कुछ छोटी मोटी गलतियाँ हो ही जाती है जैसे लड़ाई, झगड़ा, झूठ, एक दूसरे की बुराई । इस तरह की बुराइयों से हमेशा पूरी तरह बचा नही जा सकता । इसी तरह की गलतियों की तलाफ़ी के लिए सदकातुलफ़ितर (दान) को वाजिब (ज़रूरी) करार दिया गया है। फ़ितरा रोज़ो की ज़कात है जो सब मुसलमानों बालिग़, नाबालिग़ मर्द औरत पर लाज़िम है । नबी करीम स.अ.व. ने फ़ितरा को ज़रूरी करार दिया जो रोज़ेदारो के लिए बुरी और बेहयाई की बातों से पाकीज़गी (पवित्र ) होने का ज़रिया है और गरीबों और मिस्कीनोँ के लिए खाने का इंतज़ाम है जो आदमी फ़ितरा को ईद की नमाज़ से पहले अदा करता है तो यह मक़बूल ज़कात होगी और अगर कोई आदमी इसे नमाज़ के बाद अदा करता है तो यह आम सदक़ा (दान) होगा । सदक़ा तुल फ़ितर वाजिब (अनिवार्य) करने के दो मकसद है एक रोज़ेदारो की गलतियों की तलाफ़ी और दूसरा गरीबों के लिए ईद के दिन खाने का इंतज़ाम ताकि गरीब भी ईद के दिन लोगों के साथ खुशियों मे शरीक हो सके । सदक़ा तुल फ़ितर का हदीस में गेहूँ का निसाब 1 किलो 633 ग्राम है जबकि जौ और छुवारे का निसाब एक आदमी का तकरीबन 3 किलो 266 ग्राम निकलता है जिसमे जौ के हिसाब से एक आदमी के 40 रुपए और छुवारे के हिसाब से एक आदमी के 115 रुपए बनते है और गेहूँ के हिसाब से 21 रुपए बनते है सदक़ा तुल फ़ितर गेहूँ या उसके पैसे देने से भी अदा हो जाता है लेकिन बेहतर यह है कि ज़्यादा से ज़्यादा फ़ितरा दे ताकि गरीबों का फ़ाएदा हो।

Wednesday, September 1, 2010

Balanced diet for Indian soldiers. अँडा खाओ देश बचाओ Ayaz Ahmad


सैनिकों के राशन पर सीएजी की फटकार का असर नज़र आने लगा है । रक्षा मंत्रालय ने अपने जवानों की सेहत की सुध लेते हुए उनके आहार को और पौष्टिक बनाने का फैसला किया है ।इस कवायद में फील्ड और पीस एरिया में तैनात जवानों को जहाँ अब हर दिन दो अंडे दिए जाएँगे ।वहीं नौ हज़ार फुट और उससे अधिक ऊँचाई पर तैनात जवानों को दिन में एक के बजाए दो अंडे मिलेंगे । (दैनिक जागरण 31 अगस्त 2010)
सैनिकों की यह खुराक बड़े वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद तय की जाती है देश की रक्षा में तैनात जवानों की सेहत का पूरा ध्यान सरकार को रखना पड़ता है सिर्फ शाकाहार जवानों को संतुलित आहार प्रदान नही कर सकता क्योकि इससे शरीर मे सही मात्रा में प्रोटीन की ज़रूरत पूरी नही हो सकती । इसलिए सरकार ही का दायित्व है कि वह जवानों के संतुलित आहार का इंतजाम करे । क्योकि प्रोटीन की कमी के कारण जवानों मे कुपोषण हो सकता है और वह युद्ध के समय मे देश व सैनिकों के लिए घातक हो सकता है । अब देश के नागरिकों का भी फ़र्ज़ है वह भी देश के लिए हर परिस्थिति के लिए हर समय तैयार रहें देश के हर समय जान देने व लेने के लिए तैयार रहें । कभी ऐसी स्थिति आने पर मांसाहार न करने के कारण प्रोटीन की कमी के कारण कुपोषण से जूझते लोग क्या करेंगे ?
ऐसी स्थिति मे वह लोग पीठ दिखाने को विवश होंगे और पराजय का कारण भी बन सकते है । इसलिए हर व्यक्ति को प्रचुर मात्रा मे प्रोटीन के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित मेन्यू अपनाने की ज़रूरत है । इसके लिए लोगों को अपने काल्पनिक अंधविश्वासो को बाधा नही बनने देना चाहिए ।
कुछ लोग मांसाहार के खिलाफ दुष्प्रचार करके अपने लोगों को कमजोर बना रहें है ऐसा करके वह लोग जाने अनजाने शत्रु देश का काम आसान कर रहें है । इस को लेकर समय रहते जागने की ज़रूरत है अतः सभी को मिलकर देश को मजबूत बनाने के लिए मांसाहार को बढ़ावा देने की ज़रूरत है

मुजफ्फरनगर दंगे और देवबंद एके-47 केस

मुजफ्फरनगर दंगे और देवबंद के एके-47 केस में कोई समानता नहीं है लेकिन हाल ही के लिए गए निर्णयों में जहां मुजफ्फरनगर भीषण दंगो के केस वापस ल...