Monday, September 26, 2011

हिंदी ब्लॉग जगत की यह रीत अजीब है

ब्लॉगर्स मीट वीकली (10) Stop Complaining
के बारे में हमारी राय -
प्रेरणा जी की और अनवर भाई की मेहनत रंग ला रही है।

यह पोस्ट बहुत पढ़ी गई है, इस बात का पता चल रहा है HBFI के लोकप्रिय कॉलम में दिखाई देने से। इसके बावजूद इस पोस्ट पर इतने कमेंट्‌स नहीं आ रहे हैं।
इसका मतलब यह है कि लोग पढने तो आते हैं लेकिन किसी वजह से वे कमेंट से जान बचाकर निकल जाते हैं।कहीं झगडा हो तो ये नसीहतें करने ज रूर पहुंच जाएंगे लेकिन कहीं लोग प्यार से मिल जुल रहे हों तो इन्हें दो शब्द कहने की तौफीक नहीं होती।

हिंदी ब्लॉग जगत की यह रीत अजीब है।

Monday, September 19, 2011

ब्लॉगर्स मीट वीकली (9) का यह वीडियो देखकर तो दिल छलनी हो गया


रहम ए मादर में बच्चियों को मारने वाले मां बाप और डाक्टर को जितना बुरा कहा जाए, कम है.
आपकी पोस्ट का वीडियो देखकर यही लगा.
शास्त्र के बारे में भी आपने ख़ूब बताया.
आदमी जब किसी वेबसाइट का पता टाइप करता है तो वही टाइप करता है जो कि दिया गया है लेकिन दीन-धर्म के नाम पर उसे ज्ञानी गुरू जो बताते हैं, उसे करने के बजाय अपनी पसंद से जो चाहे वह करता रहता है.

ब्लॉगर्स मीट वीकली (9) Against Female Feticide में 

यही मुद्दा उठाया गया है।
इन मुद्दों को हरेक मंच से उठाया जाना चाहिए.

Thursday, September 8, 2011

देखिये कमाने के कुछ जायज़ तरीके (वीडियो), बड़ा ब्लॉगर कैसे बनें पर


अनवर भाई को नव भारत टाइम्स वेबसाइट ने उनका ब्लॉग उनके हवाले कर दिया है कि जब चाहे तब अपनी पोस्ट छाप दीजिए और जितनी मर्ज़ी उतनी छाप दीजिए.
और दूसरी तरफ़ हम हैं कि हमारा ब्लॉग ही नहीं है वहां.
...और वहां बनाकर करेंगे भी क्या ?
यहां का तो रोज़ लिखा नहीं जा रहा है.
उधर वहां बड़ा ब्लॉगर कैसे बनें पर जाकीर और मनोज पांडे जाने क्या क्या कह रहे हैं ?
हमें तो उस पोस्ट में बस यह काम की चीज़ लगी है.

देखिये कमाने के कुछ जायज़ तरीके (वीडियो)

Monday, September 5, 2011

इंटरनेट के ज़रिये आमदनी भी शुरू (एक अच्छी ख़बर) ब्लॉगर्स मीट वीकली (7) Earn Money online


 यह भी एक अच्छी ख़बर है कि अब इंटरनेट के ज़रिये आमदनी भी शुरू हो गई है।
शुरूआत कितनी ही मामूली क्यों न हो लेकिन अहम होती है।
हाजी अब्दुल रहीम अंसारी साहब जैसे उस्ताद के बारे में जानकर ख़ुशी हुई .

यह एक अच्छा ख़याल है। इस मजलिस के बहाने आपस में एक दूसरे के ख़यालात पता चल जाते हैं और यह जानकर अच्छा लगता है कि ज़्यादातर लोग अच्छा ही सोचते हैं।
यह ताक़त अगर संगठित हो जाए तो फिर थोड़े से बुरे लोग मुल्क की दौलत और मुल्क के अमन को बर्बाद नहीं कर सकते।
फ़र्क़ यही है कि अच्छे लोग अच्छे होने के बावजूद बंटे हुए हैं और इसी बंटवारे का फ़ायदा ये बुरे लोग उठा रहे हैं और अच्छे लोगों को सता रहे हैं।

अपने मज़मून के उनवान यहां देखकर अच्छा लगा।
शुक्रिया ।
देखें - 

ब्लॉगर्स मीट वीकली (7) Earn Money online

Saturday, September 3, 2011

दुनिया में गुणवत्ता व मापदंड वाले 200 विश्वविद्यालयों में भारत का एक भी विश्वविद्यालय नहीं है


अमेरिका जैसे विकसित देशों में भी भारत की प्रतिभाएं छाई हुई हैं और सबसे अधिक वैज्ञानिक भारत से ही हैं। ऐसे बहुत से उदाहरण हैं, जिनसे समझ में  आता है कि भारत में शिक्षा की नींव काफी मजबूत रही है, मगर अभी ऐसा कुछ भी नहीं है। प्रतिभाएं, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली के कारण पूरी तरह दम तोड़ रही हैं और वे विदेशों में बेहतर भविष्य की चाह लिए पलायन करने मजबूर हैं। इसके लिए निश्चित ही हमारी शिक्षा नीति ही जिम्मेदार है। इस बात पर गहन विचार करने की जरूरत है।
भारतीय शिक्षा में तमाम तरह की खामियां हैं, जिसकी खाई में देश की प्रतिभाएं समाती जा रही हैं। स्कूली शिक्षा में जहां-तहां देश में आंकड़ों के लिहाज से बेहतर स्थिति के लिए सरकार अपनी पीठ थपथपा सकती है, लेकिन उच्च शिक्षा व तकनीकी शिक्षा में उनके सभी दावों की पोल खुलती नजर आती है। एक आंकड़े के अनुसार देश में हर बरस 22 करोड़ छात्र स्कूली शिक्षा ग्रहण करते हैं, या कहें कि बारहवीं की शिक्षा प्राप्त करते हैं। दूसरी ओर देश की उच्च शिक्षा में व्याप्त भर्राशाही व खामियों का इस बात से पता चलता है कि यही आंकड़े यहां 12 से 15 फीसदी के रह जाते हैं। कहने का मतलब मुट्ठी भर छात्र ही उच्च शिक्षा की दहलीज पर चढ़ पाते हैं। ऐसी स्थिति में विदेशों में पढ़ने की चाहत छात्रों में बढ़ जाती है, क्योंकि वहां कॅरियर निर्माण की व्यापक संभावनाएं नजर आती हैं।
देश में कुछ प्रतिभाएं ऐसी भी रहती हैं, जो चाहती हैं कि वो पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत में ही अपनी उर्जा लगाए, लेकिन यहां हालात उलटे पड़ जाते हैं। उन्हें पर्याप्त संसाधन मुहैया नहीं होता, लिहाजा वे मन मसोसकर यहां से पलायन करने में ही समझदारी दिखाते हैं। भारत से हर साल लाखों छात्र पढ़ाई के लिए विदेशी धरती पर जाते हैं, उनमें से अधिकतर वहीं अपना कॅरियर बना लेते हैं। देखा जाए तो अमेरिका, आस्ट्रेलिया, इंग्लैण्ड समेत कुछ और देश हैं, जहां भारतीय छात्र शिक्षा प्राप्त करने के लिए जाते हैं। वैसे दर्जन भर देश हैं, जो भारतीय छात्र दिलचस्पी दिखाते हैं, मगर अमेरिका व आस्ट्रेलिया, इंग्लैण्ड जैसे देश मुख्य खैरख्वाह बने हुए हैं।
बीते साल आस्ट्रेलिया में नस्लभेद के नाम पर भारतीय छात्रों पर कई हमले हुए। इन घटनाओं के बाद आस्ट्रेलिया जाने वाले छात्रों की संख्या में बेतहाशा कमी आई है, लेकिन अंततः प्रतिभा पलायन के आंकड़ों पर गौर फरमाए तो स्थिति कुछ बदली हुई नजर नहीं आती है, क्योंकि इतने छात्र दुनिया के अन्य देशों की ओर उन्मुख हो गए।
भारतीय शिक्षा में व्याप्त खामियां, एक बात से और उजागर होती है कि देश में करीब छह सौ विश्वविद्यालय हैं। यहां पर जैसा शैक्षणिक माहौल निर्मित होना चाहिए या कहें कि व्यवस्था में सुधार होना चाहिए, वह नहीं होने से प्रतिभाओं को उस तरीके से विकास नहीं हो पाता और न ही वे पढ़ाई में अपनी प्रतिभा का जौहर दिखा पाते हैं, जिस तरह विदेशी विश्वविद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था में देखी जाती है।
हमारा दुर्भाग्य देखिए कि दुनिया में गुणवत्ता व मापदंड वाले 200 विश्वविद्यालयों में भारत का एक भी विश्वविद्यालय नहीं है। अमेरिका व इंग्लैण्ड ही इस सूची में छाए हुए हैं। भारत के लिए विचार करने की जरूरत है कि पहले 20 विश्वविद्यालयों में अधिकांशतः अमेरिका के ही हैं। हम अपनी पुरातन शिक्षा व्यवस्था पर जितना भी गर्व कर लें, इठला लें, मगर आज हमें इस बात को स्वीकारना पड़ेगा कि कहीं न कहीं हमारी शिक्षा व्यवस्था में खामियां हैं, जहां व्यापक स्तर पर सुधार किए जाने की जरूरत है।

असल माखज़ - http://networkedblogs.com/mvfAp?a=share&ref=nf

कार्य स्थल पर यौन शोषण ?


कार्य स्थल पर यौन शोषण की रोकथाम

क्या करें

  • याद रखें कि संविधान के तहत महिलाओं को निम्नलिखित मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं:
    - लिंग के आधार पर किसी तरह के भेदभाव के खिलाफ लिंग समानता का अधिकार
    - कोई भी व्यवसाय चलाना या कोई भी व्यापार, व्यवसाय, अथवा कारोबार संचालित करना 
    - जीवन और स्वाधीनता का अधिकार 
  • कार्यस्थल पर उनका उचित ध्यान रखा जाना चाहिए।
  • याद रखें कि भारत के संविधान में यह अपेक्षा है कि सरकार महिलाओं को न्‍यायोचित और कार्य की मानवोचित स्थिति तथा मातृत्व राहत के लिए प्रावधान करे। कामकाजी महिलाओं को कार्य स्थल पर ये सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

क्या न करें

  • महिलाओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन न करें क्योंकि वे संविधान के अनुच्छेद 32 के अन्तर्गत प्रवर्तनीय हैं तथा इनका हनन करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
  • महिलाओं के लिए बनाए गए विशेष प्रावधानों में बाधा पैदा न करें क्योंकि उन्हें भारत के संविधान के अनुरूप बनाया गया है।
  • फैक्ट्री अधिनियम की धारा 66 के अनुसार किसी भी महिला से प्रात: 0600 बजे से सायं 0700 बजे के बीच के कार्य के घंटों को छोड़कर किसी भी समय में काम नहीं लिया जा सकता/अथवा उसे काम की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
  • महिला कर्मचारियों और साथियों के प्रति भद्र व्‍यवहार करना न भूलें।
  • कार्य स्थल पर कोई भी कर्मचारी महिला कर्मचारी के यौन उत्पीड़न में संलिप्त नहीं होना चाहिए। यदि आप ऐसा करते हैं तो आपके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही हो सकती है।
  • प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से महिला कर्मचारियों के शारीरिक संपर्क आदि में संलिप्त न हों। अन्यथा इसे यौन शोषण माना जाएगा।

क्या करें

  • याद रखें कि संविधान में भी प्रत्येक भारतीय नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह महिलाओं की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए कार्य करे। इसके विरुद्ध उनकी रक्षा की जानी चाहिए।
  • सदैव कार्य के लिए प्रेरणात्मक वातावरण सृजित करने का प्रयास करें।
  • याद रखें कि हम सब की यह संयुक्त जिम्मेदारी है कि हम अपने मानवाधिकारों की रक्षा करें और ऐसे व्यवहार को दूर करें जो कि अस्वीकार्य और भेदभाव वाला हो।
  • महिलाओं के अधिकार मानवाधिकार हैं।
  • कर्मचारियों, विशेषकर महिलाओं की पर्याप्त व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करें।
  • कार्य स्थल पर यौन शोषण की रोकथाम के लिए समुचित कदम उठाएं।

क्या न करें

  • महिला कर्मचारियों पर यौन संबंधी फब्तियां न कसें।
  • कोई भी कर्मचारी प्रत्यक्ष या परोक्ष अथवा लाक्षणिक रूप से महिला कर्मचारियों को अश्‍लील साहित्‍य न दिखाए और न ही इसका प्रयास करे। यह महिला कर्मचारी के यौन शोषण की श्रेणी में आता है।
  • किसी भी महिला कर्मचारी के साथ यौन प्रकृति का अप्रिय शारीरिक, मौखिक या गैर मौखिक आचरण न करें। इस प्रकार किया गया कोई भी बर्ताव महिला कर्मचारी के यौन शोषण की श्रेणी में आता है।
  • महिला कर्मचारी को यौन की वस्तु न समझें। महिला कर्मचारियों के लिए उनके रोजगार के सिलसिले में उन्‍हें असुविधाजनक एवं अलाभकर स्‍थान में तैनात न करें।
*संविधान का अनुच्छेद 51 क(ड.). 10*  माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने विशाफका और अन्य तथा राजस्थान सरकार एवं अन्य के मामले में, एआईआर 1997 एससी 3012 में अपना निर्णय सुनाया, जिसमें "यौन शोषण को निम्नानुसार परिभाषित किया गया है :
"यौन शोषण में ऐसा अप्रिय यौन संबंधी आचरण शामिल है, जो कि प्रत्यक्ष या निहितार्थ रूप में किया गया है,जैसे कि : क) शारीरिक संपर्क और प्रस्ताव करना, ख) यौन संबंधी कोई मांग या अनुरोध, ग) यौन संबंधी टिप्पणियां, घ) अश्लील साहित्य दिखाना, ङ) यौन प्रकृति के संबंध में किसी प्रकार का अन्‍य अनुचित शारीरिक, मौखिक या गैर-मौखिकआचरण"
*यह एफ.एन.8 क्या करें में संदर्भित सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुरूप है:
  • किसी तीसरे पक्ष या बाहरी व्यक्ति द्वारा किए गए किसी कृत्य या गलती के कारण जहां कहीं यौन शोषण की घटना होती है तो प्रभावित व्यक्ति की सहायता और बचाव की कार्रवाई के रूप में सभी जरूरी तथा न्यायोचित कदम अवश्‍य उठाएं।
  • यौन शोषण के शिकार व्यक्ति  के पास यह विकल्प होना चाहिए कि वह या तो इसके लिए जिम्मेदार व्‍यक्‍ति अथवा स्वयं का स्थानांतरण करा ले।
  • याद रखें कि महिलाओं के यौन शोषण को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताया है *13 तथा यह वादयोग्य है (इसके उल्लंघन को अदालत में चुनौती दी जा सकती है)।
  • सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार यौन शोषण एक अनुशासनहीन अपराध है। अत: कर्मचारियों के आचरण और अनुशासन से संबंधित नियमों/विनियमों तथा स्थाई आदेशों में संशोधन किए जाने की आवश्यकता है ताकि ऐसे मामलों में विभागीय कार्रवाई की जा सके।
  • कम्पनी के पास महिला कर्मचारियों के यौन शोषण के मामलों की देखरेख के लिए शाखा कार्यालयों में पदनामित समन्वयक के रूप में एक "शिकायत समिति" कार्यरत है। जिस किसी को भी कोई शिकायत हो तो वह इससे संपर्क कर सकता है।
  • यौन शोषण के लिए विभागीय कार्रवाई के अलावा अनुशासन प्राधिकारी को भारतीय दंड संहिता के अन्तर्गत आपराधिक कार्रवाई शुरू करने से नहीं चूकना चाहिए:
    -अनुच्छेद 354 के तहत किसी महिला पर उसकी मर्यादा भंग करने के इरादे से उस पर हमले करने या आपराधिक बल प्रयोग करने पर 2 वर्ष की कैद की सजा या जुर्माना या दोनों के दंड का प्रावधान है।
    -किसी महिला की शालीनता को नुकसान पहुंचाने के इरादे से किसी शब्द का प्रयोग करना या कोई चेष्‍टा करना अनुच्छेद 509 के तहत एक संज्ञेय अपराध है। इसके लिए 1 वर्ष की कैद की सजा या जुर्माना अथवा दोनों दंड का प्रावधान है।
  • उत्पीड़न की आधारहीन शिकायत न करें। इससे व्यक्तिगत तौर पर शिकायतकर्ता की विश्वसनीयता और सामान्यत: महिलाओं की प्रतिष्ठा पर दुष्प्रभाव पड़ेगा।

क्या न करें

  • जहां कहीं आप जटिल प्रक्रिया पाएं तो उन्हें चिह्नित करने में संकोच न करें तथा उनमें सुधार का सुझाव दें, क्योंकि इससे भ्रष्टाचार और दुराचरण के अवसर पैदा हो सकते हैं।
  • मत भूलें कि भ्रष्टाचार से आपके संगठन की छवि धूमिल होती है, इसे दूर भगाएं।
  • कम्पनी के नियमों और विनियमों के उल्लंघन के प्रति ढील न दर्शाएं। स्थिति के अनुरूप दंडात्मक या निरोधात्मक कार्रवाई करें।
  • मत भूलें कि आपकी सतर्कता कम्पनी में चोरी, संसाधनों की हानि, लीकेज और अन्य अनुत्‍पादक गतिविधियों पर अंकुश लगा सकती है, और इस तरह प्रक्रिया में लक्ष्य हासिल करने हेतु नेतृत्व प्रदान करें।
  • किसी कर्मचारी विशेष या कनिष्ठ कर्मचारी के साथ अत्यधिक निकटता न बनाएं अन्यथा आपकी निष्पक्षता पर प्रश्न चिह्न लग सकता है।
  • जब आपकी जानकारी में सत्यनिष्ठा की कमी के मामले सामने आएं तो कठोर कार्रवाई करने से संकोच न करें।
  • अपनी संपत्ति विवरणिका समय पर प्रस्तुत करना न भूलें।

क्या करें

  • संगठन की न्यायपूर्ण कार्य प्रणाली के बारे में कर्मचारियों का विश्वास कायम करने के लिए जांचों को एक न्यायोचित गति के साथ और तटस्थ भावना से पूरा करें।
  • सतर्कता विभाग को संगठन का एक मित्र मानें तथा दिल खोलकर उसका सहयोग करें।
  • याद रखें इलाज से बचाव अच्छा होता है तथा भ्रष्टाचार से बचाव, अपराध करने के बाद सजा देने से ज्यादा बेहतर हो सकता है। अत: भ्रष्टाचार के प्रति जनता को संवेदनशील बनाने के लिए केंद्रीय सतर्कता आयुक्त ने अपने अधीन सभी संगठनों से कहा है कि वे कार्यालय के स्वागत कक्ष में एक मानक, सूचना पट्ट लगाएं जिसमें अंग्रेजी और स्‍थानीय भाषा में निम्न प्रकार लिखा गया हो : "किसी को भी रिश्वत न दें। यदि इस कार्यालय का कोई व्यक्ति रिश्वत मांगता है या आपके पास इस कार्यालय में किसी तरह के भ्रष्टाचार की कोई सूचना है या आप इस कार्यालय में रिश्चत का शिकार हुए हैं तो आप विभागाध्यक्ष या मुख्य सतर्कता अधिकारी और केंद्रीय सतर्कता आयुक्त को शिकायत कर सकते हैं (प्रत्येक के साथ नाम, पूर्ण पते और टेलीफोन नंबरों का भी उल्लेख करना होगा)।
  • याद रखिए जहां सतर्कता का अंत होता है, वहीं से समस्याएं शुरू होती हैं।

क्या न करें

  • कभी मत भूलें कि सभी फैसले संगठन के हित में हों और यथार्थ कारणों से लिए गए हों। प्रक्रिया संबंधी छोटी-मोटी त्रुटियों को नजर अंदाज किया जा सकता है लेकिन मनमानापूर्ण व्यवहार से बचा जाना चाहिए। लेकिन प्रक्रियागत विचलनों के कारणों को दर्ज करना न भूलें।
  • अपने अधीनस्थों के किसी भी आचरण पहलू को नोट करने से न चूकें, जैसे कि रहन-सहन का तरीका या उन व्यक्तियों के साथ उदारता जिनके साथ कार्यालयी कार्य व्यवहार जुड़ा है, जिससे उसकी सत्यनिष्ठा के बारे में संदेह पैदा हो सकता है।
  • अस्पष्ट आदेश जारी न करें। इससे अनियमितताओं को पनपने का आधार मिलता है।
  • आपको सतर्कता विभाग पर आशंका नहीं करनी चाहिए। सच कहें, सतर्कता विभग सभी ईमानदार लोगों का मित्र होता है।

चिकित्सा प्रतिपूर्ति

क्या करें

  • सदैव चिकित्सा प्रतिपूर्ति के सही दावे प्रस्तुत करें।
  • याद रखें कि वर्तमान में अस्पताल में भर्ती संबंधी चिकित्सा प्रतिपूर्ति योजना के अनुसार भुगतान प्रधान कार्यालय तथा शाखा कार्यालय, नोएडा और बंगलूरु के लिए पीजीआई/एम्स की दरों पर तथा हैदराबाद में जीएईटीईसी परियोजना हेतु निज़ाम अस्पताल/वीएआईआईएमएस की दरों पर प्रतिपूर्ति की जाती है।
  • अस्पताल से मुक्त होने के तत्काल बाद इलाज संबंधी दावा अनुमोदित प्रपत्र में विधिवत हस्ताक्ष कर तुरंत प्रस्तुत करें।
  • अस्पताल में भर्ती के दौरान प्रयुक्त सभी दवाइयां/उपभोग की वस्तुएं केवल पंजीकृत कैमिस्ट से ही खरीदें।

क्या न करें

  • कम्पनी के नियमानुसार ऐसे पारिवारिक सदस्यों/संबंधियों के इलाज हेतु चिकित्सा प्रतिपूर्ति के दावे प्रस्तुत न करें जो आपके आश्रित नहीं हैं।
  • अपने आश्रित पारिवारिक सदस्य के एवज में अपने संबंधियों का इलाज न कराएं,जैसे कि अपने माता/पिता के स्थान पर सास/ससुर का, अपनी पुत्री/पुत्र के बदले अपनी पुत्रवधु/दामाद का; अपनी पत्‍नी के स्‍थान पर चचेरी बहिन/शाली का इलाज न कराएं।
  • कभी भी जाली दावे प्रस्तुत न करें, यह कदाचार की श्रेणी में आता है तथा पता चलने पर आपके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
  • अस्‍पताल/नर्सिंग होम के नाम और पते के उल्लेख के साथ किसी प्रक्रिया/ऑपरेशन की पूर्व सूचना देने से न चूकें।
  • अस्‍पताल में भर्ती होने तथा ऑपरेशन की संभावित तारीख का उल्‍लेख करना न भूलें।
  • दावा प्रपत्र में पूर्ण विवरण जैसे कि ई.सी. नं., मूल वेतन तथा रोगी के नाम/दावाकर्ता के साथ संबंध आदि का पूर्ण विवरण देने से न चूकें।
  • अस्पताल में भर्ती होने पर इलाज के दौरान किसी निजी रूम/जनरल वार्ड के लिए अपनी पात्रता से अधिक की राशि का दावा प्रस्तुत न करें.
असल माखज़ -
http://mit.gov.in/hindi/node/561

Thursday, September 1, 2011

इस्लामी हिजाब इस्तेमाल करने के कुछ तरीक़े (सानिया मिर्ज़ा हिजाब में)

हिजाब मर्द के लिए भी लाज़िमी है और औरत के लिए भी लेकिन दोनों की शारीरिक संरचना में अंतर होने के कारण दोनों के हिजाब के हिस्सों और तरीक़ों में भी अंतर है।
आजकल ग़ैर मुस्लिम लड़कियां भी धूल और धूप से बचने के लिए हिजाब का इस्तेमाल करते हुए देखे जा सकती हैं।
ऐसे में यह जानकारी काम दे सकती है कि हिजाब के तरीक़े क्या हैं ?
इस मौज़ू पर बहन अंजुम शेख़ की यह पोस्ट बहुत काम देती है जिसमें हिजाब बांधने के कुछ तरीक़े बताए गए हैं।
देखिए :-

हिजाब बांधने के कुछ तरीके

अब बात करते हैं हिजाब बांधने के कुछ तरीकों की, नीचे कुछ पिक्चर्स हैं, जिन्हें देखकर हिजाब पहना जा सकता है, मतलब पर्दा किया जा सकता है.

अक्सर लोग परदे को घृणा के दृष्टि से देखते हैं, हालाँकि हर धर्म और देश में इसे मान्यता प्राप्त है, केवल कुछ जंगली प्रजातियाँ ही शरीर का पर्दा नहीं करती हैं, वर्ना सभी सभ्यताओं में इसे उचित स्थान प्राप्त था. हमारे देश हिन्दुस्तान की भी यही तहज़ीब रही है, और शरीर को दिखने की यहाँ कभी भी प्रथा नहीं रही. हिजाब, ना केवल शरीर को बल्कि बालों को भी तहज़ीब के साथ अच्छी तरह ढकता है.

अक्सर नए ज़माने को बरतरी देने वाली लड़कियां इससे नफरत करती हैं, लेकिन धूप और धूल से बचने के लिए ना केवल हिजाब बल्कि निकाब भी पहनती नज़र आती हैं. हालाँकि धर्मों में भी इन्ही वजहों से हिजाब तथा निकाब का चलन है, तथा यह इसके साथ-साथ बुरी नज़रों से भी बचाता है. और कतई ज़रूरी नहीं की अपने लक्ष्य अर्थात घर पहुँचने के बाद भी इसे पहना जाए.





[टेनिस खिलाडी सानिया मिर्ज़ा हिजाब पहने हुए]
माखज़ :- http://anjumsheikh.blogspot.com/2010/07/anjum-sheikh.html

हुस्न ने घर की छत से लेकर चने और गन्ने के खेत तक में जो शोध किया है इश्क़ पर उसका किसी को पता ही नहीं है


शायर की कल्पना यह है कि हुस्न इतना ग़ाफ़िल है कि उसे इश्क का पता ही नहीं है।
लेकिन जब शायर मिलेगा हुस्न से तो उसे पता चलेगा कि उसने हुस्न को कम करके आंका है, हुस्न ने घर की छत से लेकर चने और गन्ने के खेत तक में जो शोध किया है इश्क़ पर उसका किसी को पता ही नहीं है।
ग़ाफ़िल शायर के तौर पर मशहूर हैं देखिए वे क्या कह रहे हैं-



ऐ हुस्न तुझे इश्क़ का पता ही नहीं है।
पेश आया भी जैसे के कुछ हुआ ही नहीं है।।


उसका भी फ़ैसला है याँ दरबारे-हुस्न में,
जिस इश्क़ की कभी कोई ख़ता ही नहीं है।


तड़पे है तेरे ज़ेरे-क़दम इश्क़ बेतरह,
और तू कहे के ये तो कुछ सज़ा ही नहीं है।


ग़ाफ़िल को ना ग़ुमान था याँ के रिवाज़ का,
सब कुछ है यहाँ एक बस वफ़ा ही नहीं है।।
                                                                   -ग़ाफ़िल


असल माखज़ - http://cbmghafil.blogspot.com/2011/09/blog-post.html

मुजफ्फरनगर दंगे और देवबंद एके-47 केस

मुजफ्फरनगर दंगे और देवबंद के एके-47 केस में कोई समानता नहीं है लेकिन हाल ही के लिए गए निर्णयों में जहां मुजफ्फरनगर भीषण दंगो के केस वापस ल...