Wednesday, December 14, 2011

ख़ंज़र की क्या मजाल जो इक ज़ख़्म कर सके ? - स्वामी रामतीर्थ

शुभ विचार

लोग जीवन में कर्म को महत्त्व देते हैं, विचार को नहीं। ऐसा सोचने वाले शायद यह नहीं जानते कि विचारों का ही स्थूल रूप होता है कर्म अर्थात् किसी भी कर्म का चेतन-अचेतन रूप से विचार ही कारण होता है। जानाति, इच्छति, यतते—जानता है (विचार करता है), इच्छा करता है फिर प्रयत्न करता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसे आधुनिक मनोविज्ञान भी स्वीकार करता है। जानना और इच्छा करना विचार के ही पहलू हैं ।

आपने यह भी सुना होगा कि विचारों का ही विस्तार है आपका अतीत, वर्तमान और भविष्य। दूसरे शब्दों में, आज आप जो भी हैं, अपने विचारों के परिमामस्वरूप ही हैं और भविष्य का निर्धारण आपके वर्तमान विचार ही करेंगे। तो फिर उज्ज्वल भविष्य की आकांक्षा करने वाले आप शुभ-विचारों से आपने दिलो-दिमाग को पूरित क्यों नहीं करते।

ख़ंज़र की क्या मजाल जो इक ज़ख़्म कर सके।
तेरा ही है ख़याल कि घायल हुआ है तू।।

स्वामी रामतीर्थ

Monday, December 12, 2011

स्वामी लक्ष्मीशंकराचार्य जी का नायाब वीडियो देखा ब्लॉगर्स मीट वीकली 21 में।


उनका प्रवचन सही बात सामने लाता है।
दूसरे लिंक भी अच्छे हैं और सबसे अच्छा तब लगता है जब हमें अपनी पोस्ट के लिंक भी यहां दिखाई देते हैं। जिसके लिए हम प्रेरणा जी के शुक्रगुज़ार हैं।
ब्लॉगर मीट वीकली सच में ही उम्दा बन पड़ी है। ऐसे आयोजन इंसान के सामने इंसानियत के उसूल रखते हैं और इसमें मंदिर मस्जिद की समस्या सच्चा समाधान भी बताया गया है।

ब्लॉगर्स मीट वीकली (21) Save Girl Child

Posted on 
  • Monday, December 12, 2011

  • by 
  • prerna argal

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  • Saturday, December 10, 2011

    पत्रकार अडियार को इमरजेंसी के दौर में जेल जाना पड़ा और वहां कुरआन पढ़ने का मौक़ा मिला तो इस्लाम के उसूल सामने आ गए।

    इस्लाम कबूल करने के पहले अब्दुल्लाह अडियार डी.एम.के. के प्रसिद्ध समाचार-पत्र 'मुरासोली' के 17 वर्षो तक संपादक रहे। डी.एम.के. नेता सी.एन. अन्नादुराई जो बाद में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री भी रहे, ने जनाब अडियार को संपादक पद पर नियुक्त किया था। जनाब अडियार ने 120 उपन्यास, 13 नाटक और इस्लाम पर 12 पुस्तकों की रचनाएं की।

    जनाब अब्दुल्लाह अडियार महरहूम तमिल भाषा के प्रसिद्ध कवि, प्रत्रकार, उपन्यासकार और पटकथा लेखक थे। उनका जन्म 16 मई 1935 को त्रिरूप्पूर (तमिलनाडु) में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा कोयम्बटूर में हुई। वे नास्तिक थे, लेकिन विभिन्न धर्मों की पुस्तकें पढ़ते रहते थे।

    किसी पत्रकार और साहित्यकार को विभिन्न धर्मों के बारे में भी जानकारी रखनी पड़ती है। जनाब अब्दुल्लाह अडियार अध्ययन के दौरान इस परिणाम पर पहुंचे कि इस्लाम ही सच्चा धर्म है और मनुष्य के कल्याण की शिक्षा देता है। आखिरकार 6 जून 1987 ई। को वे मद्रास स्थित मामूर मस्जिद गये और इस्लाम कबूल कर लिया। इस्लाम कबूल करने के पहले वे डी।एम।के। के प्रसिद्ध समाचार-पत्र 'मुरासोलीÓ के 17 वर्षो तक संपादक रहे। डी।एम.के. नेता सी.एन. अन्नादुराई जो बाद में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री भी रहे, ने जनाब अडियार को संपादक पद पर नियुक्त किया था।

    जनाब अडियार ने 120 उपन्यास, 13 नाटक और इस्लाम पर 12 पुस्तकों की रचनाएं की। इमरजेंसी के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया और काफी प्रताडि़त किया गया। जेल में उन्होंने जनाब यूसुफ अली का कुरआन मजीद का अंग्रेजी अनुवाद पढ़ा और उससे काफी प्रभावित हुए। इस्लाम (इस्लाम जिससे मुझे प्यार है) पुस्तिका लिखी, जिसका बाद में हिन्दी, अंग्रेजी, मराठी, सिन्धी, मलयालम और उर्दू में अनुवाद हुआ। उनकी पत्नी थयममल जो ईसाई थीं, इस पुस्तिका को पढ़कर मुसलमान हो गयीं। इसे पढ़कर उ.प्र. के एक जमीदार 1987 ई. में मुसलमान हो गये। जनाब अब्दुल्लाह अडियार को पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल जियाउल हक ने पाकिस्तान आमंत्रित किया और विशेष अतिथि के रूप में उनका स्वागत किया। वे प्रखर वक्ता भी थे और इस्लाम पर धाराप्रवाह बोलते थे। उनके ब्रिटेन में अनेक संभाषण हुए, जिनका विषय था हजरत मुहम्मद (सल्ल.) का पवित्र जीवन। इनके कैसेट उपलब्ध हैं।

    वे तमिलभाषियों के आमंत्रण पर श्रीलंका और सिंगापुर भी गये। 1932 में तमिलनाडु सरकार ने तमिल साहित्य के विशिष्ट पुरस्कार 'कलाईमम्मानीÓ से उन्हें पुरस्कृत किया। इमरजेंसी के बाद उन्होंने 'नीरोतमÓ (पत्रिका) का प्रकाशन किया, जो बहुत लोकप्रिय हुआ। उन्होने नीरोतम प्रकाशन से ही 'तंगागुरूदुनÓ(पत्र� ��का) भी प्रकाशित की। जनाब अडियार इस्लाम को एकमात्र मुक्ति मार्ग के रूप में प्रस्तुत करते थे। उन्होंने मद्रास में इस्लामिक दावा सेन्टर कायम किया। वे 6 करोड़ तमिल जनता को इस्लाम का संदेश पहुंचाने के लिए एक इस्लामी टी.वी. चैनल की स्थापना हेतु प्रयासरत रहे। 20 सितम्बर 1996 (जुमा के दिन) को कोडम्बकम में उनकी मृत्यु हो गयी।
    (इस्लामिक वेबदुनिया)

    Monday, December 5, 2011

    प्रेरणा जी के हुनर का क़ायल कर गई ब्लागर्स मीट वीकली 20


    ब्लागर्स मीट वीकली 20 में हमारी पोस्ट 
    (भारत की ताक़त, प्यार ही प्यार बरसा हरिद्वार में) को शामिल किया गया है।
    इसके अलावा भी हमारी दीगर पोस्ट वहां देखी जा सकती हैं।
    दूसरे लिंक भी अच्छे हैं।

    ख़ास बात : सर्दियों में आंवले का मुरब्बा, गुलकंद, चंदन का अवलेह, संतुलित मात्रा में मक्खन व मिसरी का सेवन, जौ, परवल, करेला, सेंधा नमक, मुनक्का, पुराना गुड़, सोंठ, अजवायन, लहसुन, अनार, अमलताश, नई मूली, अदरक, सिरका, मधु आदि दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हैं । सर्दियां बलकारक व रसायन औषधियों के प्रयोग का सही मौसम है इसलिए प्रतिदिन च्यवनप्राश, अश्वगंधा चूर्ण, नागबला चूर्ण, अर्जुन का चूर्ण आदि का सेवन हृदयरोगियों के लिए बहुत लाभकारी हैं ।

    मुजफ्फरनगर दंगे और देवबंद एके-47 केस

    मुजफ्फरनगर दंगे और देवबंद के एके-47 केस में कोई समानता नहीं है लेकिन हाल ही के लिए गए निर्णयों में जहां मुजफ्फरनगर भीषण दंगो के केस वापस ल...