Monday, November 26, 2012

Blog News: कर्बला : इमाम हुसैन की शहादत को श्रद्धांजलि Imam Hasain & Moharram

Blog News: कर्बला : इमाम हुसैन की शहादत को श्रद्धांजलि Imam Hasain & Moharram: इमाम हुसैन की शहादत को नमन करते हुए हमारी ओर से श्रद्धांजलि

पैग़ाम ए मुहब्बत "अमन का पैग़ाम " बन जाता है.  …..एस0 एम0 मासूम 
'हिन्दी ब्लॉगर्स फ़ोरम इंटरनेश्नल' पर 

Thursday, November 22, 2012

हिन्दुस्तान में सज़ा ए मौत बाक़ी रहे या इसे ख़त्म कर दिया जाए ? Kasab:Hang Till Death -DR. ANWER JAMAL


हिन्दुस्तान में सज़ा ए मौत बाक़ी रहे या इसे ख़त्म कर दिया जाए ? Kasab:Hang Till Death

DR. ANWER JAMAL at Hindi Bloggers Forum International (HBFI) - 5 hours ago
इस पर एक लंबे अर्से से विचार चल रहा है। 21 नवंबर 2012 को कसाब को फांसी दिए जाने के बाद एक बार फिर यह मुददा उठाया जा सकता है। उसे फांसी दिए जाने से 2 दिन पहले ही संयुक्त महासभा कि मानवाधिकार समिति दुनिया भर में सज़ा ए मौत को ख़त्म करने का प्रस्ताव पास किया था। दुनिया के 140 देश सज़ा ए मौत ख़त्म कर चुके हैं और अब सिर्फ़ 58 देश ही यह सज़ा बाक़ी है। कोई भी फ़ैसला लेने से पहले यह देखना ज़रूरी है कि जिन देशों में फांसी की सज़ा नहीं है। उन देशों में जुर्म का ग्राफ़ नीचे के बजाय ऊपर जा रहा है । इग्लैंड के लोग तो अपना वतन ही छोड़ कर जा रहे हैं, जो जा सकते हैं और जिनके पास विकल्प है। 
...आखि़रकार यहां हरेक के लिए मौत है। जो फांसी से बच जाएगा, उसके लिए भी अंत है।यह तो समाज के सामने का सच है और एक सच वह है जो इंसान की मौत के बाद सामने आता है। भारत की आध्यात्मिक विरासत यही है कि यहां मौत के बाद के हालात को भी उतनी ही अहमितयत दी जाती है जितनी कि जीवन को। यही आध्यात्मिक सत्य ऐसा है जो कि आम आदमी को बुद्धत्व के पद तक ले जा सकता है बल्कि उससे भी आगे ले जा सकता है।

हरेक समस्या का हल मौजूद है लेकिन हमें समस्या के मूल तक पहुंचना होगा। शरीफ़ लोग जी सकें इसलिए ख़ून के प्यासे इंसाननुमा दरिंदों को मरना ही चाहिए।

Monday, November 19, 2012

जी हाँ, ब्लौग जगत जिंदा है अभी ... सुबूत यह है---

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ जी की पोस्ट पर हिंदूत्ववादी भाइयों का ऐतराज़ कितना जायज़ है  ?
देखिये यह पोस्ट :


जी हाँ, ब्लौग जगत जिंदा है अभी ... सुबूत के लिए ऊपर लिंक है।
आपका क्या कहना है ? 

Tuesday, September 25, 2012

नमाज़ में जिस्मानी कसरत के फायदे भी हैं और इसमें मन को सकारात्मक विचार भी मिलते हैं


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एक्सरसाइज के मामले में भारतीय काफी पिछड़े हुए हैं। शहरों में रहने वाली हमारी आबादी का एक बेहद छोटा सा हिस्सा भी व्यायाम में दिलचस्पी नहीं लेता। जबकि दूसरी सच्चाई यह है कि भारतीय शहरों में तेजी से समृद्धि बढ़ रही है और लोग पहले से ज्यादा कैलोरी ले रहे हैं। लेकिन शारीरिक गतिविधियां कम होने से उनमें ब्लडप्रेशर, डाइबिटीज और दूसरी लाइफस्टाइल बीमारियां बढ़ रही हैं। इन बीमारियों से दूर रहने का एक ही आसान तरीका है।  
एक्सरसाइज 
नमाज़ में जिस्मानी कसरत के फायदे भी हैं और इसमें मन को सकारात्मक विचार भी मिलते हैं . नमाज़ हरेक एक्सरसाइज़ से बढ़कर है। नमाज़ में सुना जाने वाला कुर'आन नमाज़ी को उसकी समस्याओं का समाधान भी देता है। नमाज़ इंसान के घमंड को भी ख़त्म करती है और आस पड़ोस से लेकर शहर और दुनिया के लोगों को मस्जिद में इकठ्ठा करके आपस में जोडती भी है। नमाज़ में दिमाग़ी एक्सरसाइज़ भी होती है क्योंकि कुर'आन की बात को उचित सन्दर्भ में समझना भी पड़ता है। ये सब लाभ उसे मिलते हैं जो नमाज़ का हक अदा करता है। उसे सही सही क़ायम  करता है। 

Friday, September 14, 2012

बड़ा ब्लागर कैसे बनें ?: ‘लंगोटिया ब्लॉगिंग‘: परिभाषा, उपयोग और सावधानियां Hindi Blogging

बड़ा ब्लागर कैसे बनें ?: ‘लंगोटिया ब्लॉगिंग‘: परिभाषा, उपयोग और सावधानियां Hindi Blogging

Comment's garden: धन वर्षा अब आपके अपने हाथ में है How To Make Amla Hair Oil At Home .

Comment's garden: धन वर्षा अब आपके अपने हाथ में है How To Make Amla Hair Oil At Home .: आप अपने लिए महाभृंगराज का तेल ख़ुद बनाइये। आंवले का तेल भी आप ख़ुद बना सकते हैं। तरीक़ा बहुत आसान है।
भृंगराज
तेल का रिज़ल्ट आपके तेल की सेल बढ़ा देगा। कुछ दूसरे तरीक़ों से भी आप तेल तैयार कर सकते हैं। इन्हें आप यूट्यूब में उपलब्ध वीडियो में देख सकते हैं।
इसी तरह आप फ़ेस पैक तैयार कर सकती हैं। इसे नींबू के रस और पानी में मिलाकर चेहरे पर लगाएं। ज़िददी कील-मुहांसे ग़ायब हो जाएंगे.

Wednesday, September 12, 2012

Blog News: एस. एम. मासूम साहब का Major Operation

Blog News: एस. एम. मासूम साहब का Major Operation
पता चला है कि ‘अमन का पैग़ाम‘ देने वाले जनाब एस. एम. मासूम साहब के दिमाग़ में ब्लड की क्लॉटिंग हो गई थी। जिसकी वजह से उन्हें मेजर आप्रेशन से गुज़रना पड़ा। इस मौक़े पर हम सब उनकी सेहत के लिए मालिक से दुआ करते हैं और उम्मीद करते हैं कि वह जल्द ही सेहतयाब होकर फिर से अमन का पैग़ाम देंगे। 

मोदी : दमन से नमन तक

Friday, September 7, 2012

बड़ा ब्लागर कैसे बनें ?: बूढ़े शरीर में भी आंख जवान रखता है बड़ा ब्लॉगर

बड़ा ब्लागर कैसे बनें ?: बूढ़े शरीर में भी आंख जवान रखता है बड़ा ब्लॉगर
अगर ब्लॉगर होम्योपैथी का जानकार भी हो तो ख़तरा और भी ज़्यादा बढ़ जाता है। डैमियाना, एसिड फॉस और कैलकेरिया फ़्लोरिका खाने वाले पर बुढ़ापा आता ही कब है ?

Thursday, September 6, 2012

जब पैसे के लिए अंग्रेजी ब्लोगर्स हिन्दी में ब्लोगिंग करने लगेंगे

आजकल एक विषय पर बहुत पोस्ट आ रही हैं। दूसरे विषय पर लिखने वाले यह सोच रहे हैं कि कोई हमारी पोस्ट तो ढंग से पढ़ ले।
मैं इतना भी नहीं सोच रहा हूँ क्योंकि ब्लोगिंग में बहुत दिनों बाद बहार आई है। बहुत से मुर्दा ब्लॉग जिंदा से दिख रहे हैं . मैं तो इसका लुत्फ़ उठा रहा हूँ। आप भी ब्लोगिंग की बहार का लुत्फ़ लीजिये। 
किसी को समझाना बेकार है। यहाँ सभी बालिग़ हैं। यहाँ सभी कमाने आये हैं . कोई इज्ज़त कमाने आया है और कोई पैसा। बहुत से तो पैसे के लिए अंग्रेजी ब्लोगिंग में चले गए हैं। 
मज़ा तब आएगा जब पैसे के लिए अंग्रेजी ब्लोगर्स हिन्दी में ब्लोगिंग करने लगेंगे। 
कौन नहीं चाहता कि ऐसा दिन आये ?

Tuesday, August 7, 2012

रिश्वत लेना-देना हराम है

तीन साल पहले दिल्ली के एक वकील साहब बचपन के किसी मुकदमे में सजायाब होकर तिहाड जेल पहुंचे, जेल में बहुत चर्चे थे, कि दिल्ली हाईकोर्ट के इतने बडे वकील साहब जेल में आ गए हैं, वकील साहब के बाकायदा दाढी थी, बडे मौलाना लगते थे, सब कैदी उनसे दबे रहते, मुकदमों के सिलसिले में मशवरा करते, वो मुफीद मशवरा देते, लोग उनसे मालूम करते कि आप इतने बडे वकील हैं फिर भी जेल में आगए, उन्होंने कहा जज रिश्‍वत मांग रही थी, मैं ने रिश्वत देने के मुकाबले में जेल को मुनासिब समझा, लोग कहते कि रिश्वत दे देनी चाहिए थी, तो वो कहते, रिश्वत देने से, मरने के बाद खतरनाक जेल जहन्नुम में जाने के बजाए यह आरजी अर्थात कुछ समय की तिहाड जेल अच्छी है। (रिश्वत लेना-देना हराम है)
आगे की कहानी -

एक मुलाकात interview

Sunday, August 5, 2012

अच्छाई को एकजुट होकर फैलाना चाहिए

लोग यह चाहते हैं कि हमें न बदलना पड़े मगर दूसरे सब बदल जाएं। वे किसी की मुसीबत में काम न आएं। कोई सड़क पर पड़ा कराह रहा हो तो वे भले ही उसे नज़रअंदाज़ करके आगे बढ़ जाएं मगर उनकी तकलीफ़ को दूर करने के लिए भागे चले आएं।
यह समाज आज जैसा भी है। इसे ऐसा हमने ही बनाया है। हम में से हरेक ने इसे ऐसा बनाया है। समाज में आज अच्छाई अच्छे लोगों के दम से है। अच्छाई को बढ़ावा दिया जाए तो अच्छाई बढ़ेगी और ऐसा करने के लिए हमें अपनी बुरी आदतों को छोड़ना होगा।
बुरी आदतों को छोड़ने की प्रैक्टिस रोज़े के ज़रिये से हो जाती है और यह सामाजिक एकजुटता को भी ज़ाहिर करती है। अच्छाई को एकजुट होकर फैलाना चाहिए।

Friday, August 3, 2012

फिर खुल जाएगी एक खुली हुई हक़ीक़त

अरविन्द केजरीवाल की अक्ल बड़ी है और उस से भी कई गुना बड़ा है उनका फैसला . उनकी लड़ाई का फायदा लेने के लिए जो अब तक उनके हक में चिल्ला रहे थे , वे अब अन्ना टीम के राजनीति में आने के फैसले को गलत बता रहे हैं .  अगर अन्ना टीम हारती है तो इसका मतलब यही होगा कि अन्ना जिस जनता के लिए लड़ रहे हैं उसे भ्रष्टाचार के बजाय जातिगत और सांप्रदायिक हितों की चिंता है.
अन्ना टीम की हार जीत भारतीय जनता के मिज़ाज की हक़ीक़त भी सामने ले आने वाली है.

Thursday, August 2, 2012

राखी के त्यौहार पर सभी बहनों को मुबारकबाद

इरादा मज़बूत हो तो याद दिलाने के लिए राखी का कच्चा धागा भी काफ़ी होता है।
राखी के त्यौहार पर सभी बहनों को मुबारकबाद और भाइयों को भी।

Tuesday, July 31, 2012

अपनी हैसियत बढ़ाने की ख्वाहिश में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की आदत

बारिश हो रही है। आम की फ़सल चल रही है। रमज़ान का महीना है। सहरी और इफ़तार सब हो रहा है। ज़कात-फ़ितरे का हिसाब लगा लिया गया है। ये सब ख़ुशियां हैं। ईद भी आएगी। यह भी ख़ुशी होगी लेकिन कभी कभी सोचता हूं कि जो अमन और जो ख़ुशियां हमें नसीब हैं वे हरेक को नसीब क्यों नहीं होतीं।
कहीं दंगा है तो कहीं आतंक। कहीं ग़रीबी और भूख है तो कहीं बेरोज़गारी और बंजर ज़मीनें। कहीं अशिक्षा है तो कहीं दहेज। कहीं सरकार की लापरवाही है तो कहीं ख़ुद अपनी कमज़ोरी।
हमारा अपना लालच और अपनी लापरवाही हमें एक ख़ुशहाल क़ौम बनने से रोके हुए है। गर्व करने के लिए कोई वजह ज़रूरी नहीं है। लोग फिर भी गर्व कर लेते हैं।
भारत भ्रष्टाचार में जकड़ा हुआ है और भ्रष्टाचार से लड़ने वाली टीम अन्ना को देश की जनता तन्हा छोड़ चुकी है। लोकपाल तो जैसे तैसे अब बन कर ही रहेगा मगर क्या मुल्क की अवाम को अपने आप को बदलने का अहसास हो पाएगा ?
अहम मुददे भी यहां अपने अहं की भेंट चढ़ा दिए जाते हैं।
ब्लॉग जगत में भी मुददे को नहीं नाम और हैसियत को समर्थन दिया जाता है। नाम और पद ठीक ठाक हो तो मर्दाना बीमारी की पोस्ट पर भी हाज़िरी लगा दी जाती है। ब्लॉगर विदेश में रहता हो तो भी वहां हाज़िरी देना अपना फ़र्ज़ समझा जाता है और कहीं सिर्फ़ मुददा ही हो लेकिन उससे जुड़कर अपनी हैसियत में इज़ाफ़ा न होता हो तो फिर वहां समर्थन देना फ़िज़ूल समझ लिया जाता है।
असल मुददों का बुरा हश्र जनता भी कर रही है और ब्लॉगर भी। सब अपनी ख़ातिर जी रहे हैं। दूसरों की ख़ातिर जान देना तो अब मूर्खता मानी जाने लगी है।
रोज़ा दूसरों की भूख-प्यास और परेशानी को ख़ुद पर झेल कर उसका अहसास करने का नाम है। दूसरों का दुख ख़ुद पर बीतेगा तो उसे दूर करने का जज़्बा भी जागेगा।
दूसरों का दुख-दर्द दूर करने का जज़्बा सब में जागे, इस रमज़ान में यही दुआ है।

Sunday, July 29, 2012

कवि व्यभिचारी चोर -सुधीश पचौरी, हिंदी साहित्यकार



एक दिन एक कवि ने शिकायत की कि आप हिंदी के लेखकों को ही क्यों ठोकते हैं? अन्य भाषाओं वाले पढ़ते होंगे, तो क्या सोचते होंगे?’
‘न ठोकता, तो तुम क्या यह सवाल करते? इस पर भी न हंसूं, तो क्या करूं? मैं तो हर बार अपने ऊपर ही हंसता हूं।’
‘जो हास्यास्पद हैं, उन पर हंसें। बाकी पर क्यों? इतने बड़े और महान लेखक हैं और आप उनकी महानता में सुई चुभाते रहते हैं!’
‘हमारे उत्तर-आधुनिक शब्दकोश में ‘महान’ शब्द ‘संदिग्ध’ है। महानता अनेक तुच्छताओं से गढ़ी जाती है। और साथी हिंदी में ऐसा कौन है, जो हास्यास्पद नहीं है? ..........

Saturday, July 28, 2012

लोग "दूसरों" की विकृतियों के माहिर हो चले हैं

विकृति को समझना मुनाफ़े का सौदा है। कविता और लेख लिखो तो कोई टिप्पणी नहीं देता मगर किसी की विकृति को पहचान लो लोग अपनी राय देने आ जाते हैं मगर शर्त यह है कि विकृति ‘दूसरों‘ में से किसी की होनी चाहिए।
अपना कोई हो तो उसे संविधान और झंडे की तौहीन करने की भी पूरी छूट है। कोई नंगेपन और समलैंगिकता का हामी हो तो हो। उसकी सोच विकृति नहीं मानी जाएगी क्योंकि वह अपने गुट का है। अपनी विकृति पर चर्चा न करना और दूसरों की विकृतियों पर तब्सरा करना भी एक विकृति है। इसे कौन समझ पाएगा ?
दूसरा सुनेगा नहीं और अपनी विकृति लोग दूर करेंगे नहीं तो सुधार कैसे होगा ?

Thursday, July 26, 2012

खुदा की इबादत का महीना है रमज़ान, इन बातों का रखें ध्यान

हिजरी कैलेंडर का नवां महीना रमज़ान होता है। पूरी दुनिया में फैले इस्लाम के अनुयायियों के लिए रमज़ान का पवित्र महीना एक उत्सव होता है। इस्लाम धर्म की परंपराओं में रमज़ान में रोजा रखना हर मुसलमान के लिए जरुरी फर्ज होता है, उसी तरह जैसे 5 बार की नमाज अदा करना जरुरी है। इस बार रमज़ान के पाक महीने की शुरुआत 21 जुलाई, शनिवार (यदि 20 जुलाई को चांद नहीं दिखा तो रमज़ान 22 से शुरु होगा) से हो रही है।




इस्लाम धर्म में रमज़ान के महीने में रोजा गहरी आस्था के साथ रखे जाते हैं। किंतु इस्लाम धर्म का रोजा सिर्फ भूखे या प्यासे रहने की परंपरा मात्र नहीं है बल्कि रोजे के दौरान कुछ मानसिक और व्यावहारिक बंधन भी जरुरी बताए गए हैं। जानते हैं रोजे के दौरान पालन किए जाने वाले नियमों को -

1- रोजे के दौरान सिर्फ  भूखे-प्यासे ही न रहें बल्कि आंख, कान और जीभ का भी गलत इस्तेमाल न करें यानी न बुरा देखें, न बुरा सुनें और न ही बुरा कहें।

- हर मुसलमान के लिए जरुरी है कि वह रोजे के दौरान सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त के बीच के समय में खान-पान न करे। यहां तक कि कुछ गलत सोचे भी नहीं। 

- रोजे की सबसे अहम परंपराओं में सेहरी बहुत लोकप्रिय है। सेहरी शब्द सेहर से बना है जिसका शाब्दिक अर्थ है सुबह। जिसका नियम है कि सूर्य के उदय होने से पहले उठकर रोजेदार सेहरी खाते हैं। इसमें वह खाने और पीने योग्य पदार्थ लेते हैं। सेहरी करने के बाद सूर्य अस्त होने तक खान-पान छोड़ दिया जाता है। इसके साथ-साथ मानसिक आचरण भी शुद्ध रखते हुए पांच बार की नमाज और कुरान पढ़ी जाती है। सूर्यास्त के समय इफ्तार की परंपरा है।

- इस्लाम धर्म में बताए नियमों के अनुसार पांच बातें करने पर रोजा टूट जाता है- पहला झूठ बोलना, दूसरा बदनामी करना, तीसरा किसी के पीछे बुराई करना,चौथा झूठी कसम खाना और पांचवां लालच करना।
माखज़ - http://religion.bhaskar.com/article/utsav--ramzan-the-month-of-lords-prayer-keep-these-things-in-mind-3547126-NOR.html

Tuesday, July 24, 2012

रोज़ा के आध्यात्मिक लाभ


आध्यात्मिक लाभः 
(1) इस्लाम में रोजा का मूल उद्देश्य ईश्वरीय आज्ञापालन और ईश-भय है, इसके द्वारा एक व्यक्ति को इस योग्य बनाया जाता है कि उसका समस्त जीवन अल्लाह की इच्छानुसार व्यतीत हो। एक व्यक्ति सख्त भूक और प्यास की स्थिति में होता है, खाने पीने की प्रत्येक वस्तुयें उसके समक्ष होती हैं, एकांत में कुछ खा पी लेना अत्यंत सम्भव होता है, पर वह नहीं खाता पीता। क्यों ? इस लिए कि उसे अल्लाह की निगरानी पर दृढ़ विश्वास है। वह जानता है कि लोग तो नहीं देख रहे हैं पर अल्लाह तो देख रहा है। इस प्रकार एक महीने में वह यह शिक्षा ग्रहण करता है कि सदैव ईश्वरीय आदेश का पालन करेगा और कदापि उसकी अवज्ञा न करेगा।
(2) रोज़ा ईश्वरीय उपकारों को याद दिलाता औऱ अल्लाह कि कृतज्ञता सिखाता है क्योंकि एक व्यक्ति जब निर्धारित समय तक खान-पान तथा पत्नी के साथ सम्बन्ध से रोक दिया जाता है जो उसकी सब से बड़ी इच्छा होती है फिर वही कुछ समय बाद मिलता है तो उसे पा कर वह अल्लाह ती प्रशंसा बजा लाता है।
(3) रोज़ा से कामवासना में भी कमी आती है। क्योंकि जब पेट भर जाता है तो कामवासना जाग उठता है परन्तु जब पेट खाली रहता है तो कामवासना कमज़ोर पड़ जाता है। इसका स्पष्टिकरण मुहम्मद सल्ल. के उस प्रबोधन से होता है जिसमें आया है कि "हे नव-युवकों के समूह ! तुम में से जो कोई विवाह करने की शक्ति रखता हो उसे विवाह कर लेना चाहिए क्योंकि इसके द्वारा आँखें नीची रहती हैं और गुप्तांग की सुरक्षा होती है।"
(4) रोज़े से शैतान भी निदित और अपमानित होता है क्योंकि पेट भरने पर ही कामवासना उत्तेजित होता है फिर शैतान को पथभ्रष्ट करने का अवसर मिलता है। इसी लिए मुहम्मद सल्ल0 के एक प्रवचन में आया है "शैतान मनुष्य के शरीर में रक्त की भांति दौड़ता है।भूख (रोज़ा) के द्वारा उसकी दौड़ को तंग कर दो"।


(माखज़ व मुसन्निफ़ : Safat Alam Taimi))

Sunday, July 22, 2012

[प्यारी माँ] एक आवाज़ बीमार भ्रूण हत्या के खि़लाफ़

ईमेल से प्राप्त :-
प्यारी बेटी अनम की याद में, जो जन्नत का फूल बन गई है.
अनम ने हमें बताया है कि हर साल न जाने कितने करोड़ ऐसे अनाम मासूम होते हैं, जिनके क़त्ल में हमारी ख़ामोश हिस्सेदारी है, जिन्हें हमने कभी देखा नहीं बल्कि जिन्हें हम जानते तक नहीं हैं।
अनम हमारे दिलों में आज भी मौजूद है। हम भी उसकी मौजूदगी को बनाए रखना चाहते हैं। अनम की याद के बहाने हम उस जैसे करोड़ों मासूमों को याद कर पाते हैं। हो सकता है कि कभी लोगों में समझदारी जागे और वे इनके हक़ में भी कभी आवाज़ बुलंद करें।
बीमार भ्रूणों की रक्षा के लिए आप यह पोस्ट देखें और इस आवाज़ को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करें-

यह एक सामाजिक मुददा है। यह तवज्जो चाहता है। विकलांग या बीमार होना कोई जुर्म नहीं है। उनके लिए भी हमारे दिलों में और हमारी दुनिया में जगह होनी चाहिए।

Monday, July 16, 2012

इसलाम के आर्थिक मॉडल की कामयाबी की वजह क्या है ?

इसलाम में आर्थिक व्यवस्था के मार्गदर्शक सिद्धांत Islamic Economics

लेखक : डा. सैयद ज़फ़र महमूद info@zakatindia.org
अनुवाद: डा. अनवर जमाल
पूरी क़ौम के एक बड़े से केक में से सारे नागरिकों को एक बड़ा टुकड़ा मिलेगा। यह बात तक़सीम के ग़ैर बराबरी वाले सिस्टम की वजह से यक़ीनी नहीं है। (यानि पूरी क़ौम या देश की कुल पैदावार बहुत ज़्यादा होने के बावजूद यह ज़रूरी नहीं है कि सारे ही नागरिकों की आमदनी का स्तर बढ़ गया है) इसके खि़लाफ़ इसलाम के आर्थिक मॉडल की कामयाबी यह है कि यह हरेक नागरिक की बुनियादी ज़रूरतों की पूर्ति को यक़ीनी बनाने की क्षमता रखता है।
http://www.islamdharma.blogspot.in/2012/07/islamic-economics.html

Tuesday, July 10, 2012

ब्लॉगिंग क्या है ?

अपने ख़यालात ज़ाहिर करने का एक तरीक़ा है.
जो लोग ब्लॉगिंग नहीं करते, वे भी अपने ख़यालात ज़ाहिर करते ही हैं. कोई पान की दुकान पे तो तो कोई यूं ही बिना किसी दुकान के. औरतें भी अपना ख़याल ज़ाहिर करती हैं और मर्दों से ज़्यादा करती हैं.
हरेक का ख़याल है कि वह सबसे ज़्यादा अक्लमंद है और दूसरे उसकी बात मान लें तो उनका बेड़ा पार हो जाएगा. ऐसा सोचने में कोई हरज भी नहीं है. अपना दिल है जो चाहे सोचो. दिक्कत तब आती है जब ख़यालात आपस में टकरा जाएं. ख़याल आपस में टकरा जाते हैं तो दरहक़ीक़त दिल आपस में टकराते हैं. इसका दिल टूटे या उसका या दोनों का. टकराव होगा तो टूट फूट ज़रूर होगी.
आपकी ब्लॉगिंग में आपकी शख्सियत झलकती है
तंज़ करने वाले भी तंज़ सहने की ताक़त नहीं रखते. पढ़े लिखे लोगों की मजलिस में बुरी बातें देखकर एक लंबे अर्से तक ब्लॉग पर कुछ लिखने का जज़्बा ही सर्द पड़ गया था .
ब्लॉगिंग को जुड़ने का ज़रिया बनाया जाए तो अच्छा रहेगा. अपनी बात कहिए और दूसरे की सुनिए. धौंस धमकी और अपमान की भाषा बोलने से बचिए. इसके लिए अपने दिल को धोइये. जब तक नफ़रतें दिल में रहेंगी ज़ुबान से आप मुहब्बत के फूल खिला ही नहीं सकते.
अपने घमंड की ख़ातिर कभी औरत मर्द का मुददा यहां बना दिया जाता है और कभी उसे हिन्दू मुस्लिम का मुददा बना दिया जाता है. यह बुरी बात है. 

Monday, July 9, 2012

मुक़ददमेबाज़ी से अच्छी मुसीबत क्या हो सकती है ?

आपकी ब्लॉगिंग में आपकी शख्सियत झलकती है
तंज़ करने वाले भी तंज़ सहने की ताक़त नहीं रखते. पढ़े लिखे लोगों की मजलिस में बुरी बातें देखकर एक लंबे अर्से तक ब्लॉग पर कुछ लिखने का जज़्बा ही सर्द पड़ गया. 
ब्लॉगिंग को जुड़ने का ज़रिया बनाया जाए तो अच्छा रहेगा. अपनी बात कहिए और दूसरे की सुनिए. धौंस धमकी और अपमान की भाषा बोलने से बचिए. इसके लिए अपने दिल को धोइये. जब तक नफ़रतें दिल में रहेंगी ज़ुबान से आप मुहब्बत के फूल खिला ही नहीं सकते.
अपने घमंड की ख़ातिर कभी औरत मर्द का मुददा यहां बना दिया जाता है और कभी उसे हिन्दू मुस्लिम का मुददा बना दिया जाता है. यह बुरी बात है. 
ब्लॉगिंग क्या है ?
अपने ख़यालात ज़ाहिर करने का एक तरीक़ा है.
जो लोग ब्लॉगिंग नहीं करते, वे भी अपने ख़यालात ज़ाहिर करते ही हैं. कोई पान की दुकान पे तो तो कोई यूं ही बिना किसी दुकान के. औरतें भी अपना ख़याल ज़ाहिर करती हैं और मर्दों से ज़्यादा करती हैं.
हरेक का ख़याल है कि वह सबसे ज़्यादा अक्लमंद है और दूसरे उसकी बात मान लें तो उनका बेड़ा पार हो जाएगा. ऐसा सोचने में कोई हरज भी नहीं है. अपना दिल है जो चाहे सोचो. दिक्कत तब आती है जब ख़यालात आपस में टकरा जाएं. ख़याल आपस में टकरा जाते हैं तो दरहक़ीक़त दिल आपस में टकराते हैं. इसका दिल टूटे या उसका या दोनों का. टकराव होगा तो टूट फूट ज़रूर होगी. 
टकराव क़ानूनी शक्ल ले ले तो दिक्क़त और ज़्यादा बढ़ जाती है। एक तरफ़ से केस होगा तो दूसरा भी मरता क्या न करता, वह भी पलटकर करेगा ही. हज़ार किलोमीटर चलकर वह आपके शहर आएगा तो हज़ार किलोमीटर दूर अपने शहर में वह आपको भी बुलाएगा. काटते रहिए चक्कर। कई साल बाद लोअर कोर्ट से फ़ैसला होगा, फिर उसके बाद ऊपर और ऊपर अपील होती रहती है। मर्डर करने वालों के केस में, जिनमें सज़ाएं भी सुना दी गईं, वे सज़ाएं भी आखि़रकार माफ़ हो गईं। पीड़ित पक्ष की सारी पैरवी रखी रह गई। जिसके पास ज़मीन जायदाद हो वह तो मुक़ददमे की पैरवी झेल सकता है लेकिन नौकरीपेशा ब्लॉगर अपनी नौकरी करेगा, अपने बच्चे पालेगा या मुक़ददमों की तारीख़ पर हाज़िरी देगा ?
औरत कहीं जाएगी तो पति पहले पूछेगा कि कहां जा रही हो ?
औरत क्या बताएगी अपने पति को कि मुक़ददमा करने जा रही हूं ?
पति पूछेगा कि किस बात के लिए मुक़ददमा करने जा रही हो ?
पहले पति को उस पोस्ट का प्रिंट आउट निकाल कर दो. पहले वह उसे पढ़ेगा. पोस्ट अच्छी लगी तो वह उसकी दाद भी देगा. पति अच्छा हुआ तो साथ चलने के लिए मान भी जाएगा। उसके बाद सास ननदें भी पूछेंगी कि   कहां जा रही हो ?
बाल-बच्चे भी पूछेंगे कि मम्मी हमें छोड़कर आप कहां जा रही हो ?
तारीख़ें पड़ते हुए जब दो चार साल हो जाएंगे तो फिर मुहल्लेवाले भी पूछेंगे कि भाभी जी मुक़ददमा अभी तक लटका ही पड़ा है या कुछ फ़ाइनल हुआ ?
समाज भी ग़ैर ज़िम्मेदार है. एक बात में चार अपनी तरफ़ से जोड़कर सारे मुहल्ले और सारी रिश्तेदारी में फैला देंगे. उनके भी अपने ख़याल है. वे बिना ब्लॉगिंग के इधर उधर ही अपनी पोस्ट रिलीज़ कर देते हैं.
दूसरे को सज़ा तो जब होगी तब होगी, पहले अपनी इज़्ज़त का जनाज़ा ज़रूर निकल जाएगा.
किराए वैसे ही आसमान छू रहे हैं। कुछ लोगों को बैठे बिठाए नई नई मसीबतें मोल लेने का शौक़ भी होता है। मुक़ददमेबाज़ी से अच्छी मुसीबत क्या हो सकती है ?

जानते हैं शादी की सबसे अच्छी बात क्या है ?


पुरानी ब्लागर पुराने लिंक बांट रही है. कल देखा तो 3 पुरानी पोस्ट के लिंक थे. उनमें उसकी फ़ज़ीहत के क़िस्से थे. अक्ल पुरानी हो और उसमें टेंशन भी घुस जाए तो ब्लागर ऐसा कर देता है. किसी ने समझाया होगा तो उसने वे तीनों पोस्ट के लिंक हटा दिए. आज सुबह खोला तो पेज़ एक्ज़िस्ट नहीं था और अब ‘कारण बताओ‘ के शीर्षक पर क्लिक करो तो वहां अब न यह शीर्षक है और न ही वे 3 पुराने लिंक. थोड़ा सा भी ईगो पर चोट लग जाए तो ब्लागर कितना अपसैट हो जाता है ?
वह किसी काम का नहीं रह जाता. बस नए पुराने लिंक ही बांटता रहता है. ख़ुद भी बेचैन रहता है और दूसरों में भी चेतावनियां दे कर बेचैनी फैलाता रहता है. ऐसे ही लोगों ने ब्लागिंग का कबाड़ा करके रख दिया है. आज ही अख़बार में भी आया है-
फ़ेसबुक बढ़ा रहा है बेचैनी


हिंदी ब्लागिंग का हाल देखो तो यह बेचैनी के साथ परेशानी भी बढ़ा रही है. 

शीशा हमें तो आपको पत्थर कहा गया
दोनों के सिलसिले में ये बेहतर कहा गया

ख़ुददारियों की राह पे जो गामज़न रहे
उनको हमारे शहर में ख़ुदसर कहा गया

इक मुख्तसर सी झील न जो कर सका उबूर
इस दौर में उसी को शनावर कहा गया

उसने किया जो ज़ुल्म तो हुआ न कुछ भी ज़िक्र
मैंने जो कीं ख़ताएं तो घर घर कहा गया

मैं ही वो सख्त जान हूं कि जिसके वास्ते
तपती हुई चट्टान को बिस्तर कहा गया

दोस्तो ! शादी की न हो और सावन आ जाए तो फिर कितना ही कारण पूछते रहो, बताने कोई भी नहीं आता। शादी की सबसे अच्छी बात यह है कि यह इतने सारे नए नए मसले खड़े कर देती है कि पुराने मसले उनके सामने छोटे लगने लगते हैं और तब वह उन्हें नज़र अंदाज़ कर देता है।
कारण पूछ कर जीना भी कोई जीना है, ख़ास तौर से उम्र के आखि़री पड़ाव में।
वैसे शादियां इस उम्र में भी हो जाती हैं और ग़लती तो कभी भी सुधारी जा सकती है।
अपनी शादी न करने कोई कारण न बताओ, बस शादी कर लो। ख़ुद भी चैन से जिओ और दूसरों को भी चैन से जीने दो। 

Sunday, July 8, 2012

DR. ANWER JAMAL के मज़मून का एक जुज़



हरेक चीज़ का एक मक़सद होता है।
इंसान का भी एक मक़सद है।
हरेक मक़सद हासिल करने के लिए एक रास्ता होता है।
इंसान के लिए भी एक रास्ता है, जिस पर चलकर उसे अपना मक़सद हासिल करना है।
जब इंसान अपना मक़सद ही भूल जाता है तो फिर वह रास्ते को भी भूल जाता है। आज इंसान अपने मक़सद को भूल गया है। इसीलिए वह अपने रास्ते से हट गया है।
... अनन्त जीवन देने वाले परमेश्वर को पाना ही इंसान का सच्चा मक़सद है।


सत्य के अंश से मनुष्य के जीवन की अंश मात्र समस्याएं हल होती है जबकि पूर्ण सत्य से मनुष्य की आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक और आध्यात्मिक सभी समस्याएं हल हो जाती हैं। 
समस्याओं के हल का स्तर ही यह तय करता है कि किस ग्रन्थ में सत्य अंश मात्र है और किस ग्रन्थ में पूर्ण है ?

Saturday, July 7, 2012

हिंदी ब्लागर किस पोस्ट को ज़्यादा पढ़ते हैं ?-एक सर्वे जनहित में


एक बार एक कवि ने कहा था कि आपको पोस्ट लिखने की ज़रूरत ही नहीं है। बस वक्ष वक्ष वक्ष और ऐसे ही अल्फ़ाज़ लिख दीजिए। लोग पागलों की तरह उसे ऐसे पढ़ने के लिए टूट पड़ेंगे जैसे उन्होंने कभी वक्ष देखा ही न हो।
कुछ शरपसंद ब्लागर ऐसे हैं कि जब उनकी बात नहीं मानी जाती तो वे अपने निजी मुददे को सांप्रदायिकता से जोड़ देते हैं। कहते हैं कि फ़लां ब्लाग पर उस विशेष पार्टी की औरतों के नाम और फ़ोटो हैं और उस ब्लाग की पोस्ट में ऐसे वैसे अल्फ़ाज़ भी हैं और ऐसे वैसे अल्फ़ाज़ वाली पोस्ट उस ब्लाग पर सबसे ज़्यादा पसंद की जा रही हैं।
भाई पढ़ने वाले भी तुम्हारी पार्टी के ही हैं। इस तरह तो तुम ख़ुद यह बता रहे हो कि हमारे लोग उन पोस्टों पर टूट कर पड़ते हैं जिनमें ऐसे वैसे अल्फ़ाज़ हों।
उसी ब्लाग पर सैकड़ों दूसरी पोस्टें भी हैं जिनमें ये अल्फ़ाज़ नहीं हैं। उन्हें पढ़ा होता तो ‘लाइक‘ के कालम में वे दूसरी पोस्टें आ जातीं जिनमें टेक्नीकल जानकारी या दूसरी बातें बताई गई हैं।
‘लाइक‘ कालम में ऐसी वैसी पोस्टों को लाया कौन ?
हिंदी ब्लागर ही लाए हैं और कौन लाया है !!!
इसी विशेष ब्लाग पर नहीं हर ब्लाग पर ऐसी पोस्टों के पाठक सबसे ज़्यादा मिलेंगे।
अपने ब्लाग का स्टैट चेक करो तो पता चलता है कि हिंदी ब्लागर कैसे कैसे घिनौने अल्फ़ाज़ लिखकर पढ़ने का मसौदा तलाश करते हैं।
यह देखा तो कुछ औरतों ने तो औरतपने ही हदें पार करके ही लिखना शुरू कर दिया। बाद में ये ऐसे लजाती हैं जैसे कि , जैसे कि ...
शीर्षक में प्यार, बोल्ड और वासना अल्फ़ाज़ का इस्तेमाल कीजिए और फिर देखिए कि आपके पाठक कितने ज़्यादा बढ़ जाते हैं। हिंदी ब्लागरों को यही सब पसंद है। 
दीन धर्म की बात बताने वाले ब्लाग पर ब्लागर जाते ही कहां हैं ?
ब्लागर अच्छी चीज़ें पढ़ना शुरू करें तो हरेक ब्लाग का ‘लाइक‘ कालम अपने आप बदल जाएगा।
जो भी कविता करने वाली बोल्ड होकर लिखे, उसे पढ़ो ही मत और वह लिखे और ब्लागर पढ़ें तो फिर उछल कूद मत मचाओ कि हाय ! हमारा पढ़ा हुआ सबसे ज़्यादा पढ़ा हुआ क्यों बन गया ?
ज़्यादा उछल कूद मचाओगे तो पर्दा तुम्हारा ही खुलेगा कि तुम इंटरनेट पर बीवी बच्चों को छोड़कर दिन रात पढ़ते क्या हो ?

औरतों की मौजूदगी में व्यक्ति बहस से बच नहीं सकता

हम कई बार तय नहीं कर पाते कि  इस पोस्ट पर क्या कमेन्ट दें ?
मेरे साथ यही हुआ जब मैंने 'ब्लॉग  की ख़बरें' देखीं .
औरतों की मौजूदगी में व्यक्ति काम वासना के आकर्षण से बच नहीं सकता.
यह महात्मा बुद्ध ने बताया था . यह पोस्ट पढ़कर मुझे लगा कि
औरतों की मौजूदगी में व्यक्ति बहस से बच नहीं सकता.
कोई मुझे बताये कि इस पोस्ट पर क्या कमेन्ट दिया जाए ?

धर्म के नाम पर 'सेक्स' का खेल

Thursday, July 5, 2012

झंडे का रंग कोई भी हो, डंडा हमारा ही चलेगा.

दोस्त का काम है मिलना . सो वो मिले. हमने कहा कि  अगर झंडे का रंग भगवा हो जाए तो कैसा रहेगा ?
बोले, अच्छा रहेगा.
हमने कहा कि हमारे लिए कोई डरने वाली बात तो नहीं है न ?
बोले, डरने वाली बात उस दिन होगी जब डंडे का साइज़ और उसका रंग डिस्कस किया जाएगा.
हमने कहा तब कोई डर नहीं है.
दोस्त ने हैरत से पूछा, क्यों ?
भाई, आजकल अपने डंडे की बड़ी डिमांड है. झंडे का रंग कोई भी हो. डंडा हमारा ही लिया जाता है. हमारे डंडे में जान है न !
अतः झंडे का रंग कोई भी हो, डंडा हमारा ही चलेगा.

विज्ञान ने खोजा गॉड पार्टिकल

बह्मांड की उत्पत्ति और जीवन के सृजन संबंधी कई प्रश्नों का जवाब देने में सक्षम गॉड पार्टिकल को बुधवार को खोज लिया गया।

स्विटजरलैंड और फ्रांस की सीमा पर स्थित 27 किलोमीटर लंबी एक भूमिगत सुरंग में हिग्स बोसोन पर वर्ष 2009 से दिन-रात शोध कर रही यूरोपीय परमाणु शोध संगठन (सर्न) की दो टीमों (एटलस) और (सीएमएस) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में इससे मिलते-जुलते कण के अस्तित्व की बात स्वीकार की।

सर्न की ओर से जारी बयान में कहा गया कि हमें अपने आंकड़ों में एक नए कण के पाए जाने के स्पष्ट संकेत मिले हैं। यह हमारे शोध संयंत्र लार्ज हेड्रोन कोलाइडर के 125 और 126 जीईवी क्षेत्र में स्थित है। यह एक अद्भुत क्षण हैं। हमने अब तक मिले सभी बोसोन कणों में से सबसे भारी बोसोन को खोज निकाला है। सर्न ने इन नए आंकड़ों को सिग्मा 05 श्रेणी में स्थान दिया है, जिसके मायने होतें हैं नए पदार्थ की खोज। सेर्न के महानिदेशक राल्फ ह्यूर ने कहा कि प्रकृति को लेकर हमारी समझ में इजाफा करने की दिशा में हमने एक मील का पत्थर हासिल कर लिया। सेर्न के शोध निदेशक सेर्गियो बर्तालुकी ने हिग्स बोसोन के आस्तित्व की दिशा में प्रबल संकेत मिलने पर गहरी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि हमारे लिए इतने अद्भुत नतीजों को लेकर उत्साहित नहीं होना बेहद चुनौतीभरा काम है। हमने पिछले वर्ष ठान लिया था कि 2012 में या तो हम हिग्स बोसोन को खोज निकालेंगे अथवा हिग्स थ्योरी को ही खारिज कर देंगे। हम एक अहम पड़ाव पर पहुंच गए हैं और भविष्य में इन आंकड़ों पर और अधिक प्रकाश पड़ने से हमारी समझ में इजाफा होगा। हिग्स बोसोन पर आए मौजूदा नतीजे वर्ष 2011 के आंकड़ों पर आधारित हैं और इस वर्ष के आंकड़ों पर भी अभी भी अध्ययन चल रहा है। हिग्स बोसोन पर 2011 के आंकड़ों से जुड़ी सेर्न की विस्तृत रिपोर्ट के इस महीने के आखिर तक जारी होने की उम्मीद है। इन नतीजों के जारी होने के साथ ही ब्रह्म कण (गॉड पार्टिकल) अब एक रहस्य या परिकल्पना मात्र नहीं रह गया है। ब्रिटिश वैज्ञानिक पीटर हिग्स ने वर्ष 1964 में इस कण की परिकल्पना को जन्म दिया था। इस कण का नाम हिग्स और भारतीय वैग्यानिक सतरूद्रनाथ बसु के नाम पर रखा गया था। दुनिया भर के वैज्ञानिक पिछले चार दशकों के दौरान हिग्स बोसोन के आस्तित्व को प्रमाणित नहीं कर पाए। ऐसा माना जाता है कि 13.7 अरब वर्ष पहले जब बिग बैंग कहलाने वाले महाविस्फोट के जरिए ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई होगी तो हिग्स बोसोन आस्तित्व में आया होगा और इसी से पदार्थ तथा दूसरे कणों की रचना हुई होगी तथा आकाशगंगाओं नक्षत्रों तथा जीवन इत्यादि ने आकार लिया होगा। वैज्ञानिक इसी वजह से इसे ब्रह्माकण (गॉड पार्टिकल) का नाम देते हैं। सृष्टि में हर चीज को कार्य करने के लिए द्रव्यमान की आवश्यकता होती है। अगर इलेक्ट्रानों में द्रव्यमान नहीं होता तो परमाणु नहीं होते और परमाणुओं के बगैर दुनिया में किसी भी चीज का सृजन असंभव था। डा हिग्स ने इसे लेकर सिद्धांत की खोज की जिसे आगे चलकर (हिग्स सिद्धांत) के तौर पर जाना गया। इससे कणों का द्रव्यमान सुनिश्चित्त करना संभव हो सका। डा हिग्स ने कहा कि इस माडल को काम करने के लिए एक सबसे भारी कण की आवश्यकता थी जिसे हिग्स बोसोन का नाम दिया गया। हिग्स बोसोन अभी तक एक परिकल्पना मात्र ही था लेकिन वैज्ञानिकों को चूंकि इसके कुछ विशेष लक्षण ज्ञात थे इसलिए उन्हें पता था कि अगर वे इसे खोजने की मुहिम छेड़ते हैं तो यह कैसा दिखाई देगा। हिग्स बोसोन का द्रव्यमान बाकी सभी बोसोन कणों में सबसे अधिक था। सेर्न के वैज्ञानिकों के अनुसार ब्रह्म कण की खोज सुपर कणों और डार्क मैटर की खोज का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।
दैनिक हिन्दुस्तान दिनांक 5 जुलाई 2012 में प्रकाशित 

Wednesday, July 4, 2012

Blog News: धर्म के नाम पर 'सेक्स' का खेल

अख्तर खान साहब ने वह पोस्ट ही मिटा डाली है जो उनके सचिव ने भास्कर डोट कॉम से एक अंश उठाकर उनके ब्लॉग  पर पोस्ट बना दी थी. जिन ब्लॉगर्स ने अख्तर साहब के ब्लॉग पर मात्र एक अंश पर आपत्ति प्रकट की , उनमें से किसी ने भास्कर डोट कॉम की पूरी पोस्ट  पर भी कोई आपत्ति प्रकट नहीं की जो कि 8 गुना ज़्यादा है , है न कमाल की बात ?
कुछ हिंदी ब्लॉगर्स ऐसी दोहरी सोच लेकर भी बुद्धिवादी कहलाते हैं.
Read entire story :
Blog News: धर्म के नाम पर 'सेक्स' का खेल
PHOTOS: धर्म के नाम पर कुछ यूं खेला जाता रहा है 'सेक्स' का खेल!

Monday, June 25, 2012

आत्महत्या, ड्रग्स और परिवार नियोजन

आज भारत में हर चौथे मिनट पर एक नागरिक आत्महत्या कर रहा है. हरेक उम्र के आदमी मर रहे हैं. अमीर ग़रीब  सब मर रहे हैं. उत्तर दक्षिण में सब जगह मर रहे हैं। हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई सब मर रहे हैं। बच्चे भी मर रहे हैं। जिनके एक दो हैं वे ज्यादा मर रहे हैं और जिनके दस पांच हैं वे कम मर रहे हैं। जिनके एक बच्चा था और वही मर गया तो माँ बाप का परिवार नियोजन सारा रखा रह  जाता  है। दस पांच में से एक चला जाता है तो भी माँ  बाप के जीने के सहारे बाक़ी रहते हैं। जिन्हें दुनिया ने कम करना चाहा वे बढ़ रहे हैं और जो दूसरों का हक़ भी अपनी औलाद के लिए समेट  लेना चाहते थे उनके बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं  या फिर ड्रग्स लेकर मरने से बदतर जीते रहते हैं। 
कोई अक्लमंद अब इन्हें बचा नहीं सकता। ऊपर वाला ही बचाए तो बचाए . 
लेकिन वह किसी को क्यों बचाए जब वह  उसकी मानता ही नहीं .
जिसके सुनने के कान हों वह सुन ले।

Tuesday, June 19, 2012

नई नस्ल को आत्महत्या से कैसे बचाएं ?

सेक्स और क्राइम की दलदल से अपनी नस्ल को कैसे बचाएं ?

करे कोई भरे कोई ... 

हुआ यूं कि उनका बेटा न जाने कैसे एक-के बाद एक कुछ स्त्रियों के चक्कर में फंस गया उसकी ज़िंदगी में आने वाली तीनों लड़कियों में से दो ने उसे प्यार में धोखा दिया तीसरी बार एक महिला जो खुद 2 बच्चों की माँ थी उसने उसके साथ सहानभूति रखते हुए संबंध बनाए और एक दिन हद पार हो जाने के बाद उसका वीडियो बना कर उस लड़के को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। बदले में मांगी 5 लाख रुपये की धनराशि...



...
आदर्श चरित्र का अनुसरण किया जाए तो नई नस्ल को आत्महत्या से बचाया जा सकता है.

Sunday, June 17, 2012

अपने माँ-बाप के प्रति कृतज्ञ हो

याद करो जब लुकमान ने अपने बेटे से, उसे नसीहत करते हुए कहा, "ऐ मेरे बेटे! अल्लाह का साझी न ठहराना। निश्चय ही शिर्क (बहुदेववाद) बहुत बड़ा ज़ुल्म है।" (13) और हमने मनुष्य को उसके अपने माँ-बाप के मामले में ताकीद की है - उसकी माँ ने निढाल होकर उसे पेट में रखा और दो वर्ष उसके दूध छूटने में लगे - कि "मेरे प्रति कृतज्ञ हो और अपने माँ-बाप के प्रति भी। अंततः मेरी ही ओर आना है (14) किन्तु यदि वे तुझपर दबाव डाले कि तू किसी को मेरे साथ साझी ठहराए, जिसका तुझे ज्ञान नहीं, तो उसकी बात न मानना और दुनिया में उसके साथ भले तरीके से रहना। किन्तु अनुसरण उस व्यक्ति के मार्ग का करना जो मेरी ओर रुजू हो। फिर तुम सबको मेरी ही ओर पलटना है; फिर मैं तुम्हें बता दूँगा जो कुछ तुम करते रहे होगे।"- (15)
-क़ुरआन, 31, 12-21

Sunday, May 27, 2012

सफलता उन्हें ही मिलती है जो सफलता के लिए दृढ़ संकल्प होकर प्रयास करते हैं


सफलता में मेहनत का कोई विकल्प नहीं


करिअर निर्माण में लाखों छात्र अपने-अपने ढंग से सफलता के लिए जद्दोजहद करते नज़र आते हैं। परन्तु अधिकांश छात्रों को यह शिकायत रहती है कि उन्हें सफलता नहीं मिली जबकि उन्होंने इसके लिए कड़ी मेहनत की थी। आखिर अधिकतर छात्रों को यह शिकायत क्यों होती है? क्यों उन्हें लगता है कि सफलता उन्हें नहीं मिली जबकि वे इसके लिए सतत प्रयासरत थे। अधिकतर छात्र इससे निराश हो जाते हैं तथा उनका मनोबल गिरता जाता है और इससे उनकी क्षमता अत्यधिक प्रभावित होती है। इससे उनकी रुचि तथा यहां तक कि याददाश्त क्षमता भी प्रभावित हो जाती है। इससे अगली विफलता का मार्ग प्रशस्त हो जाता है और उनकी सारी योजनाएं धरी रह जाती हैं।

विफलता अगली सफलता को प्रभावित करती है जबकि छात्रों को विफलता का उपयोग अगली बार सफलता को प्राप्त करने में करना चाहिए। यह मान्य तथ्य है कि छात्रों के पास समय का अभाव होता है तथा एक निश्चित अवधि के भीतर ही उन्हें अपनी सभी योजनाओं को कार्यान्वित करना होता है। फलस्वरूप अधिकांश छात्र किसी ऐसे मंत्र या जादू की तलाश में लग जाते हैं जो पलक झपकते ही उनकी मुश्किलें आसान कर दे।


छात्रों को एक बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिए या यूं कहें कि गांठ बाध लेनी चाहिए कि मेहनत का कोई अन्य विकल्प न तो किसी जमाने में था, न अब है और न ही किसी जमाने में होगा। सफलता के लिए आपको खुद ही एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाना होगा। आप खुद अवलोकन करें तो संभव है कि आप कुछ ऐसी बातों को समझ पाएंगे कि कौन-कौन सी बातें आपको सहायता प्रदान कर सकती हैं यथा किस वक्त आप अधिक स्मरण कर सकते हैं, किस वक्त आपको कौन-सी सामग्री का अध्ययन अधिक रमता है, किस वक्त आपको सो जाना चाहिए, किस वक्त आप उठकर अधिक गहनता से अध्ययन कर पाते हैं। ये कुछ ऐसी बातें हैं जो निश्चय ही आपकी क्षमता में वृद्धि कर सकती हैं। परन्तु यहां इस बात को समझ लें कि यह मेहनत का विकल्प नहीं, बल्कि कुछ सहायक बातें हैं, जो आपके द्वारा की जा सकती हैं। इससे आपकी कड़ी मेहनत को आयाम मिलेगा तथा उसके द्वारा अधिक से अधिक सफलता मिलने की संभावना बढ़ेगी।


कई प्रकार के सर्वेक्षणों में भी यह बात सामने आई है कि अधिक मेहनती व्यक्ति, जो सामान्य बुद्धि वाला होता है, सफलता प्राप्त करता है। उनके मुकाबले जो कुशाग्र तो होते हैं, किन्तु कम मेहनत करते हैं, सफलता तक नहीं पहुंच पाते। छात्रों को यह बात अपने जेहन में हमेशा याद रखनी चाहिए कि उनका कार्य कड़ी मेहनत करना है, जिसकी दिशा एवं दशा ठीक और समयानुकूल होनी चाहिए। उसके पश्चात अगर इन्हें असफलता मिलती है तो भी धैर्य खोने की आवश्यकता नहीं अपितु यह देखना चाहिए कि आखिर कहां चूक हो गई। उसमें सुधार कर वे अगली सफलता सुनिश्चित कर सकते हैं। याद रखिए कि सफलता उन्हें ही मिलती है जो सफलता के लिए दृढ़ संकल्प होकर प्रयास करते हैं(अनिल कुमार,दैनिक ट्रिब्यून,7.12.11)।

Wednesday, May 23, 2012

बुज़ुर्गों के साथ शर्मनाक हादसे

नागपुर।। नागपुर में एक शर्मनाक घटना सामने आई है। आरोप के मुताबिक, यहां पर शराब के नशे में एक शख्स ने अपनी 65 साल की सास का रेप कर दिया। घटना के बाद से ही आरोपी रमेश गव्हाणे फरार है। रेप की शिकार महिला की बेटी ने कोराडी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस गव्हाणे की तलाश में जुट गई है।
पुलिस का कहना है कि सोमवार की रात गव्हाणे की पत्नी अपनी बेटी को उसके ससुराल काटोल पहुंचाने गई थी। उसी रात 11 बजे गव्हाणे शराब के नशे में घर लौटा। पहले उसने अपने बेटे को पीटा और उसे घर से बाहर निकलने को कहा। उस समय उसकी सास सो रही थीं। गव्हाणे ने उन पर हमला बोल दिया और फिर उनके साथ रेप किया। गव्हाणे 3 बच्चों का बाप है।
पुलिस सब इंस्पेक्टर पी.वी. फाडे ने बताया, ‘पड़ोस में रहने वाली एक औरत अगले दिन जब गव्हाणे की सास से मिलने आई तो उनकी साड़ी पर लगे खून के धब्बे से उसको शक हुआ कि कुछ गलत हुआ है। जब उसने इस बाबत पूछा तो पीड़िता रोने लगीं और उन्होंने पूरी घटना के बारे में उसको बताया। पड़ोसन ने तुरंत कोराडी पुलिस को खबर दी और रमेश की बीवी को भी इसकी सूचना दी।’
फाडे ने आगे बताया कि गव्हाणे पहले भी कई औरतों के साथ बदसलूकी कर चुका है, पर उसकी पत्नी के अच्छे व्यवहार के चलते किसी भी महिला ने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। पीड़िता को इंदिरा गांधी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है और उन्हें वहां पर 15 दिनों तक रखा जाएगा। पुलिस का कहना है कि पीड़िता के पास हॉस्पिटल का खर्च उठाने के लिए पैसे भी नहीं हैं।

Tuesday, May 22, 2012

Hindi Bloggers Forum International (HBFI): दहेज मांगने वाले गधे और कुत्ते से भी बदतर हैं

Hindi Bloggers Forum International (HBFI): दहेज मांगने वाले गधे और कुत्ते से भी बदतर हैं
गधे और कुत्ते, दोनों की ज़िंदगी इस बात की गवाह है कि वे दहेज कभी नहीं मांगते।
दहेज एक बुरी रस्म है। जिसने इसकी शुरूआत की उसने एक बड़ी बेवक़ूफ़ी की और जिसने भी सबसे पहले दहेज मांगा, उसने लालच की वजह से ही ऐसा किया। आज भी यह रस्म जारी है। एक ऐसी रस्म, जिसने लड़कियों के जीवन का नर्क बना दिया और लड़कों को आत्म सम्मान से ख़ाली एक बिकाऊ माल।
यही बिकाऊ दूल्हे वास्तव में गधे और कुत्ते से बदतर हैं।

Sunday, May 20, 2012

ख़ुशी रईसों की दाश्ता है

अजब मसायल से वास्ता है
न हल है कोई न रास्ता है

गुज़र रहा है ज़माना कुछ यूं
उसूल कोई न ज़ाब्ता है

मिज़ाज क्यूं हो गया है ऐसा
ग़र्ज़ किसी से न वास्ता है

ग़रीबों का हमनवा है ग़म और
ख़ुशी रईसों की दाश्ता है

निशात के दिन गुज़र गए ‘शाज़‘
उदास लम्हों से राब्ता है

शाज़ रहमानी,
कटिहार, बिहार

Wednesday, May 16, 2012

AHSAS KI PARTEN: मुस्लिम छात्र ने खिड़की से कूदकर नंगी लड़कियों से जान बचाई

AHSAS KI PARTEN: मुस्लिम छात्र ने खिड़की से कूदकर नंगी लड़कियों से जान बचाई
यह वाक़या एक ऐसी यूनिवर्सिटी में हुआ है जिसमें शिक्षा सत्र पूरा होने के बाद 5 हज़ार लड़कियां नंगे होकर मैराथन रेस में हिस्सा लेती हैं। उनकी कपड़ों की निगरानी यूनिवर्सिटी की तरफ़ से की जाती है। उनके कपड़ों को तौला गया तो आधा टन वज़्न हुआ।

यह ख़बर कल 15 मई 2012 को राष्ट्रीय सहारा उर्दू के पृ. 12 पर छपी।
इस ख़बर से इस्लाम और पश्चिमी दुनिया की सोच और किरदार एक साथ सामने आ जाते हैं। पश्चिमी दुनिया का नंगापन हिंदुस्तान में भी आम होता जा रहा है। नई तालीम दिलाने वाले मां-बाप अपनी औलाद के लिए ऊंचे ओहदे का ख़याल तो रखते हैं लेकिन उसके किरदार का क्या होगा ?

Tuesday, May 15, 2012

‘सत्य की खोज‘

जो लोग पढ़ने के शौक़ीन हैं और ‘सत्य की खोज‘ में हैं, उनके लिए मौलाना वहीदुद्दीन ख़ान साहब की ये दोनों ही किताबें फ़ायदेमंद हैं। 

‘सत्य की खोज‘ Literature

Monday, May 14, 2012

हरेक समस्या का अंत , आत्मावलोकन से

एक अहम् बात यह है कि 
समय समय पर महापुरूष आए और ‘अपना कर्म‘ करके चले गए। अब महापुरूषों की इस पावन भूमि पर आप हैं। सद्-प्रेरणा लेना-देना और सत्कर्म करना अब आपकी ज़िम्मेदारी है। देखिए कि आप क्या कर रहे हैं ?
इसी आत्मावलोकन से हरेक समस्या का अंत आप कर सकते हैं तुरंत।
इंसान का असल इम्तेहान यही है कि वह अपने ज्ञान और अपनी ताक़त का इस्तेमाल क्या करता  है ?

Sunday, May 13, 2012

देख कर चेहरे को हाले दिल समझ जाती है मां

भूक जब बच्चों को आंखों से उड़ा देती है नींद
रात भर क़िस्से कहानी कह के बहलाती है मां

सब की नज़रें जेब पर हैं, इक नज़र है पेट पर
देख कर चेहरे को हाले दिल समझ जाती है मां

Saturday, May 12, 2012

इटालियन राजदूत के दिल में दाखि़ल हुआ नूरे इस्लाम

इस्लाम हरेक ज़माने में अपनी सच्चाई के बल पर फैलता आया है और आज भी फैलता चला जा रहा है। 
इस्लाम क्या है ?
एक ख़ुदा को अपना मालिक और सब हाकिमों का हाकिम मानकर ज़िंदगी गुज़ारना, इस यक़ीन के साथ कि जो कुछ मैं कर रहा हूं, वह उसे देख रहा है। मुझे बुराई से बचना है और भलाई की राह पर चलना है कि यही उसने मेरा फ़र्ज़ मुक़र्रर किया है।
देखिए बिना तलवार के कैसे और कहां फैल रहा है इस्लाम ?
Those whom Allah (in His Plan) willeth to guide He openeth their breast to Islam; those whom He willeth to leave straying He maketh their breast close and constricted as if they had to climb up to the skies: thus doth Allah (heap) the penalty on those who refuse to believe. {Al An’am (06):125}

The Italian Ambassador to Saudi Arabia Reverts To Islam

Cardeilli, who speaks Arabic, is the first ambassador to revert to Islam in Saudi Arabia home to Islam's holiest sites in Makkah and Madinah, according to a dawah center in Batha which handles Muslim reversions.
Nouh ibn Nasser, director of the Batha center, said the Italian converted on Nov. 15, the day before the start of the holy month of Ramadan. "He came to the office and read the two testimonies (necessary to declare faith) and then prayed with us " Nasser said.
Cardeilli, 59, was not available for comment as he left Riyadh to Rome on Saturday. But in a press statement, the ambassador expressed his happiness over his reversion to Islam. He said he was fully convinced about the truthfulness of Islam through his regular reading of Allaa's final revelation, the Holy Quran.
During his 34-year diplomatic career, Cardeilli, a graduate in linguistics and oriental civilization, has been posted to several Arab countries and took up his current post in Riyadh in November 2000.
Cardeilli was born in 1942. He is married and father of two. He was first appointed at the Italian Foreign Ministry's political office in 1967 and previously worked as a diplomat in Sudan, Syria, Iraq,Libya, Albania and Tanzania.
In September, Italian Prime Minister Silvio Berlusconi sparked outrage across the Arab and Muslim world with remarks over the West's "superiority" over Islam. Berlusconi insisted his comments were misinterpreted by a hostile left-wing Italian press and has since outlined his "deep respect for Islam" as a great religion. 
The dawah center's Nouh said that on average three to four people come to his office daily to embrace Islam, and the number rises to five during Ramadan. Twenty similar offices operate in Riyadh and there are many more in the other cities throughout the Kingdom.
For his part, Mohammed Abbas Afesh, of the World Assembly of Muslim Youth (WAMY), told Arab News that his organization has recently distributed a great deal of Islamic literature in English among the diplomatic missions in Riyadh, including the Italian Embassy.
"We also arranged lectures on various aspects of Islam. As a result of this effort, a few people, including some women, embraced Islam," Abbas said, adding that the events of Sept. 11 had sparked a great deal of interest in Islam among Christians.
"They want to know about the concept of jihad and other relevant matters. Overall, they are receptive to the message of Islam.
इस्लाम की आग़ोश में सुकून पाने और उसकी गवाही देने वालों की कहानियों में से कुछ यहां हैं-
American MuslimTurning Muslim in Texas video (24 min) 

Christian Americans Turning to Islam video (3 min 15 sec)
Lauren BoothLauren Booth, Tony Blair's sister-in-law, broadcaster and journalist converts to Islam. Read about her journey to Islam and the heart warming reaction of her family. 
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CarlaCarla I was raised in a strict Roman Catholic home, the middle daughter of three children. One very sad and unfortunate day my mother told us that my father had been in a car accident. Read more... (also available in Arabic,Dutch, French, German, Hebrew, Italian, Portuguese, Spanish, and Tagalog)
Judge Marilyn MorningtonJudge Marilyn Mornington is a District Judge in England, an international lecturer, and writer on family law including domestic violence.
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Yvonne RidleyYvonne Ridley, born in county Durham, England is a Former Taliban Captive, Broadcaster, British Journalist, Human Rights Activist, war correspondent and now Convert To Islam. She is best known for her capture by the Taliban whilst working undercover in Afghanistan. Read more...
Captain Jacques-Yves CousteauCaptain Jacques-Yves Cousteau is a great French scientist - oceanographer, initiator of researches of sea and ocean depths, inventor of an aqualung, underwater house, the device for «diving saucer», author of many popular books and films, is known in entire world. Read more...
Daniel StreichDaniel Streich The Swiss politician Daniel Streich, who rose to fame as a result of his opposition to mosques in his homeland, has now embraced the faith he reviled. 
Read more...
Aminah AssilmiAminah Assilmi was born as a Southern Baptist and was a feminist working for women's rights. She had her education in recreation and broadcast journalism. Although she was initially opposed by her entire family for accepting Islam in 1977, subsequently most of her family membes accepted Islam. She is currently the President of the International Union of Muslim Women. Read more...
Pamela BarrettPamela Barrett "Liquor brought me to my knees and Allah was there to help me back up." "I sometimes see this journey as one Allah has chosen for me and which He isn't going to let me out of!" "For me, embracing Islam has been the single greatest gift ever granted to me. I am still grateful and awestruck by it." Read more...
Yusuf EstesYusuf Estes a devout music Baptist minister, converts to Islam after preaching Christianity for years. His wife and his father, himself a priest who established churches, soon followed him. This is a story of how call to conscience makes one forego social status and submit himself/herself to God. Read more...
Malcolm XMalcolm X was one of the most powerful and charismatic African-American leaders of the country. He converted to Nation of Islam and became a follower of its leader Elijah Muhammad. As a Nation of Islam leader, his message was essentially anti-white until he undertook and performed the Hajj (pilgrimage) to Mecca. Impressed by his discovery of true Islam in the Muslim lands he visited, he left Nation of Islam and became an orthodox Muslim, leaving his prior racial standing. Read more...
Leopold WeissLeopold Weiss (1900-1992), who became famous in the Muslim world as Muhammad Asad, was born in a Jewish family in what is now part of Germany. He worked in the Middle East as correspondent of prestigious German and Swiss newspapers. He traveled widely throughout the world and authored many books on Islam including a translation of the Qur'an. He accepted Islam in 1926. 
Read more... | Read 'Road to Mecca' (also available in German, French & French Video)
Dr. Jeffrey LangDr. Jeffrey Lang (b. 1954) was born as a Catholic but became an atheist during his high school years despite the efforts of his Catholic teacher and parents to convince him of the existence of God. He remained an atheist for the next 10 years throughout his undergraduate, graduate, and doctoral studies. He accepted Islam in early 1980's and authored two books: "Struggling to Surrender" (1994) and "Even Angels Ask" (1997) Read more...
Dr. Murad HofmannDr. Murad Wilfried Hofmann (b. 1931) was born as a Catholic in Germany in 1931. He graduated from Union College in New York and completed his legal studies at Munich University where he received a doctorate in jurisprudence in 1957. He became a research assistant for the reform of federal civil procedure, and in 1960 received an LL. M. degree from Harvard Law School. He was Director of Information for NATO in Brussels from 1983 to 1987. He was posted as German ambassador to Algeria in 1987 and then to Morocco in 1990 where he served for four years. He accepted Islam in 1980 and authored several books on Islam. Read more...
Dr. T.J. WinterDr. T. J. Winter, known now as Abdal-Hakim Murad, is a British convert to Islam. He received his masters degree from the Cambridge University at England and later studied at Al Azhar. He was a research fellow at the Oxford University. Currently, he is a lecturer of Theology at Cambridge University. Among his works is the translation of al Bayhaqi's "Seventy-Seven Branches of Faith" into English. He has also authored many articles about Islam and Muslims. Read more...
Marc SpringerMarc Springer Involved with the neo-nazi skinhead movement, he grew up as an anti-Islam, anti-Muslim racist. His passion into reading eventually led him to read about Islam and Muslims, and finally to Islam, turning around his life completely from disbelief to a devoted worshipper of Allah. “People say that miracles do not happen today, but I would contend that my story proves them wrong.” Read more...
Dr. Jerald F. DirksDr. Jerald F. Dirks is a former minister (deacon) of the United Methodist Church and biblical scholar with extensive scholarship in early Christianity. He holds a Master's degree in Divinity from Harvard University and a Doctorate in Psychology. Author of "The Cross and the Crescent: An Interfaith Dialogue between Christianity and Islam" (2001), and "Abraham: The Friend of God" (2002). He formally accepted Islam in 1993. Read more...
Rev. David Benjamin KeldaniRev. David Benjamin Keldani (1867-19xx) was a former Catholic bishop and an expert in biblical documents and languages. He published many scholarly articles about early Christianity before accepting Islam in 1904. He is the author of "Muhammad in the Bible", a scholarly book of linguistic analysis about reference to Prophet Muhammad (p) in the Old Testament. After accepting Islam, he became known as Prof. Abdul-Ahad Dawud. Read more...
Yusuf Islam (Cat Stevens)Yusuf Islam (Cat Stevens) a revert to Islam, the famous British Pop-star converted to Islam in 1979. He was probably the first international singer to sing Islamic songs in English. His first few songs were "Alef is for Allah", "Where are you going?", "Allah is the only one God". He currently lives in London, England. Read more...
Torquato CardilliTorquato Cardilli, Italy's Ambassador to Saudi Arabia, converted To Islam. In a press statement, Torquato Cardilli expressed his happiness and said that he was fully convinced of the truthfulness of Islam through his regular readings of the Holy Qur’an. Read more...
Everlast (Eric Schrody)Everlast (Eric Schrody) Taking Islam One Day at a Time. Rapp music has seen more than its share influence from the religion of Islam. The religion seems to be a recurrent theme in the genre, both impacting lyrics and lives. One artist more recently touched by Islam is Eric Schrody, better known in music circles as Everlast. Read more...
Muhammad AliMuhammad Ali (born Cassius Marcellus Clay Jr. in 1942) is a retired American boxer and former three-time World Heavyweight Champion and winner of an Olympic Light-heavyweight gold medal. Ali changed his name after joining the Nation of Islam in 1964 and subsequently converted to Sunni Islam in 1975. Read more...
Dr. Maurice BucailleDr. Maurice Bucaille A Famous French Scholar and Surgeon Embraces Islam. Read more...
Rick FentonRick Fenton accepted Islam in 2008. He writes: "I knew about the Bible, but had never made the connection to it. All of the sermons I had heard in the two previous years of attending Catholic school had never impacted me until this particular sermon." Read more...
Ann SpauldingAnn Spaulding "Nor can Goodness and Evil be equal. Repel (Evil) with what is better" – Qur’an. Two days after 9/11, a young man attacked her – mistaking her as an Arab – in a grocery store. He ran his shopping cart onto her, pushing her against the shelves. One of the shelves collapsed with cans hurling down on her, cutting her head and face. When he was arrested by the authorities, she gave him two choices: face criminal prosecution or attend 10 hours of Islamic lecture. He chose the latter. Six months later, after completing the sessions, he became a Muslim.Read more...
Rosalyn RushbrookRosalyn Rushbrook (b. 1942), is none other than the famous British author Ruqiyyah Waris Maqsood. At age 8, she became a deeply committed Christian. She studied Theology at the Hull University, and taught religion as Head of Religious Studies for 32 years at various UK schools. It was primarily her own biblical studies and research into early Christianity which led to her to Islam in 1986. Read more...
Jacqueline CosensD. Jacqueline Cosens, now known as Jumaana Salma Amatullah, worked in health care, management, as an equine trainer, elementary tutor, newspaper editor, researcher, and freelance writer. She spent spare times studying, painting, writing articles, stories, and poetry, some of which were published in the U.S. and abroad. Read more...
Austin RoeAustin Roe, now known as Waa’il Abdul Salaam, converted to Islam by his own volition at the age of merely 10 years old. He movingly describes how difficult his childhood was and how the touch of Islam has changed his life entirely around. Read more...
RaphaelRaphael, a forty-two-year-old Latino, is a Los Angeles-based comic and lecturer. He was born in Texas where he attended his first Jehovah's Witness meeting at age six. He gave his first Bible sermon at eight, tended his own congregation at twenty, and was headed for a position of leadership among the 904,000 Jehovah's Witnesses in the United States. But he traded his Bible for a Qur'an after having braved a visit to a local mosque. Read more...
Imam Abu KadrImam Abu Kadr From Imprisonment on Death Row to a Respected Leader in his Community. Read more...
Omar Abdul-SalaamOmar Abdul-Salaam In this issue of the Bulletin we would like to introduce you to a gentleman who rose from the depths of despair and darkness into the light of Islam. We hope you will find it as inspiring as we did. Read more...
Ismail GoodwinIsmail Goodwin An Account Of An American Who Accepted Islam. Ismail Goodwin is a white American who works for Pacific Bell in San Francisco and lives in South San Francisco. He became a Muslim on May 15, 1991 at the Islamic Center in San Francisco. Read more...
Vincent MontagneVincent Montagne An Account of a French Scholar Who Accepted Islam Read more...
Maryam JameelahMaryam Jameelah An Account of an American Jewish Lady Who Accepted Islam Read more...
Ibrahim Khalil AhmadAl-Haj Ibrahim Khalil Ahmad, formerly Ibrahim Khalil Philobus, was an Egyptian Coptic priest who studied theology and got a high degree from Princeton University. He studied Islam to find gaps to attack it; instead he embraced Islam with his four children. Read more...
Abd al-Hayy MooreMr. Abd al-Hayy Moore has two books of poetry published by City Lights under the name Daniel Moore. He's traveled extensively, living in England, Morocco, Algeria, Nigeria and Spain. Mr. Moore is a talented writer and poet, and has turned his talents in writing for Islam. He is a contributor to 'The Minaret' and other publications. His more recent publications are 'The Chronicles of Akhira', 'Halley's Comet', and 'Holograms'. Read more...
Other StoriesStories of New Muslims A collection of stories of people who embraced Islam. 
in pdf format (885 KB)
Jews for AllahTestimonies of Jewish Converts To Islam Thousands of Jews convert to Islam. These are the testimonies of a few of our fellow Jewish brothers and sisters who have accepted Islam as their religion. in pdf format (281 KB)
Angela's ConversionAngela's Conversion to Islam video
200 Germans convertion to IslamShahada / Declaration of Faith of over 200 people video / audio 
Witness over 200 people converting to Islam in Germany (in German)
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 ये सब कहानियां इस बात का सुबूत हैं कि इस्लाम हरेक ज़माने में अपनी सच्चाई के बल पर फैलता आया है और आज भी फैलता चला जा रहा है।

मुजफ्फरनगर दंगे और देवबंद एके-47 केस

मुजफ्फरनगर दंगे और देवबंद के एके-47 केस में कोई समानता नहीं है लेकिन हाल ही के लिए गए निर्णयों में जहां मुजफ्फरनगर भीषण दंगो के केस वापस ल...