Wednesday, February 29, 2012

बैल से "ऋषभक" तक, एक बहस

शाकाहारी भाइयों को यह गवारा नहीं है कि कोई यह कहे कि वैदिक यज्ञों में पशु बलि होती थी.
निरामिष ब्लॉग पर एक पोस्ट देखिये :

ऋषभ कंद - ऋषभक का परिचय ।। वेद विशेष ।।


इस पर यह कहा गया है:

पूछने वाले ने तो पहले यह पूछा था कि-
वह कौन सी औषधि है जिसके पैर , आंखें और 26 पसलियां हों ?
### क्या इस न मिलने वाले "ऋषभक" के पैर , आंखें और 26 पसलियां हैं ?
### अगर नहीं हैं तो फिर यह "ऋषभक" कहाँ हुआ ?
‘आपको यह जानकर हैरानी होगी कि प्राचीन कर्मकांड के मुताबिक़ वह अच्छा हिंदू नहीं जो गोमांस नहीं खाता. उसे कुछ निश्चित अवसरों पर बैल की बलि दे कर मांस अवश्य खाना चाहिए.‘
(देखें ‘द कंपलीट वकर््स आफ़ स्वामी विवेकानंद, जिल्द तीन, पृ. 536)
इसी पुस्तक में पृष्ठ संख्या 174 पर स्वामी विवेकानंद ने कहा है ,
‘भारत में एक ऐसा समय भी रहा है जब बिना गोमांस खाए कोई ब्राह्मण ब्राह्मण नहीं रह सकता था.‘

भाई साहब ब्राह्मणों पर हम कोई आक्षेप नहीं लगा रहे हैं बल्कि जो कुछ स्वामी विवेकानंद जी आदि बता रहे हैं उसी का उद्धरण हम यहां दे रहे हैं और आप ऐसा नहीं कह सकते कि उन्हें वैदिक संस्कृति का सही ज्ञान नहीं था।

यज्ञ में पशुओं के साथ व्यवहार

उदीचीनां अस्य पदो निधत्तात् सूर्यं चक्षुर्गमयताद् वातं प्राणमन्ववसृजताद्.
अंतरिक्षमसुं दिशः श्रोत्रं पृथिवीं शरीरमित्येष्वेवैनं तल्लोकेष्वादधाति.

एकषाऽस्य त्वचमाछ्य तात्पुरा नाभ्या अपि शसो वपामुत्खिदता दंतरेवोष्माणं
वारयध्वादिति पशुष्वेव तत् प्राणान् दधाति.

श्येनमस्य वक्षः कृणुतात् प्रशसा बाहू शला दोषणी कश्यपेवांसाच्छिद्रे श्रोणी
कवषोरूस्रेकपर्णाऽष्ठीवन्ता षड्विंशतिरस्य वड्. क्रयस्ता अनुष्ठ्योच्च्यावयताद्. गात्रं गात्रमस्यानूनं कृणुतादित्यंगान्येवास्य तद् गात्राणि प्रीणाति...ऊवध्यगोहं पार्थिवं खनताद् ...अस्ना रक्षः संसृजतादित्याह.
-ऐतरेय ब्राह्मण 6,7
अर्थात इस पशु के पैर उत्तर की ओर मोड़ो, इस की आंखें सूर्य को, इस के श्वास वायु को, इस का जीवन (प्राण) अंतरिक्ष को, इस की श्रवणशक्ति दिशाओं को और इस का शरीर पृथ्वी को सौंप दो. इस प्रकार होता (पुरोहित) इसे (पशु को) दूसरे लोकों से जोड़ देता है. सारी चमड़ी बिना काटे उतार लो. नाभि को काटने से पहले आंतों के ऊपर की झिल्ली की तह को चीर डालो. इस प्रकार का वह पुरोहित पशुओं में श्वास डालता है. इस की छाती का एक टुकड़ा बाज की शक्ल का, अगले बाज़ुओं के कुल्हाड़ी की शक्ल के दो टुकड़े, अगले पांव के धान की बालों की शक्ल के दो टुकड़े, कमर के नीचे का अटूट हिस्सा, ढाल की शक्ल के जांघ के दो टुकड़े और 26 पसलियां सब क्रमशः निकाल लिए जाएं. इसके प्रत्येक अंग को सुरक्षित रखा जाए, इस प्रकार वह उस के सारे अंगों को लाभ पहुंचाता है. इस का गोबर छिपाने के लिए जमीन में एक गड्ढा खोदें. प्रेतात्माओं को रक्त दें.

अब आप ख़ुद देख सकते हैं कि यह पशु का वर्णन है या किसी औषधि का ?
Link-
http://www.niraamish.blogspot.in/2011/11/mass-animal-sacrifice-on-eid.html

Thursday, February 23, 2012

देख तमाशा दुनिया का - 'एक लिंक्स चर्चा'

1- आज की चर्चा में आप सबका हार्दिक स्वागत है
एक प्रिंसिपल चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी नियुक्त नहीं कर सकता, लेकिन उसने राजपत्रित अधिकारियों ( प्रवक्ता ) की नियुक्ति की । हरियाणा सरकार बैकडोर इंट्री के रूप में हुई इस भर्ती को जायज ठहराने की हर संभव कोशिश कर रही थी , लेकिन हाई कोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि सरकार अतिथि अध्यापकों के दवाब में काम कर रही है , यह भर्ती न्यायसंगत नहीं है । यह फैसला झटका है गेस्ट टीचर्स को और ऊँगली उठाता है हरियाणा सरकार की कार्य प्रणाली पर ।

अतिथि कब जाओगे ? ( चर्चामंच - 798 )  

2-

लंबे बच्चे चाहिए तो दूर की बीवी लाएं


BBCसुनने में यह बात अजीब-सी लग सकती है, लेकिन पोलैंड के वैज्ञानिकों का दावा है कि अगर पति और पत्नी एक ही शहर के हैं तो उनके बच्चे का कद नाटा रहेगा।





3-

सफ़ेद बाल काले कीजिए नीम से

नीम का तेल नाक के नथुनों में चंद क़तरे रोज़ाना टपकाएं आपके बाल अगर उम्र से पहले सफ़ेद हो गए हैं तो वे काले हो जाएंगे।


Tuesday, February 21, 2012

चिरकुटानंद ब्लॉगर किसे कहते हैं ?, पुरस्कार वितरण विवाद

मनोज साहब ने ईनाम बांटने का काम शुरू किया। ईनाम उन्होंने कम को बांटा और ज़्यादातर को उन्होंने ‘चिरकुट‘ का खि़ताब दे दिया। कहते हैं कि जो ब्लॉगर प्रब्लेस शिखर पुरस्कार के लिए प्रविष्टि न भेजे या किसी के नाम का अनुमोदन न करें और हमारे पुरस्कार वितरण की समीक्षा करे तो वे ब्लॉगर ‘चिरकुटानंद‘ हैं। यह स्तर है प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ के सर्वेसर्वा के सोचने का, और इसके बावजूद वह चाहते हैं कि विद्वान हिंदी ब्लॉगर उनसे पुरस्कार पाने के लिए लाइन लगाकर खड़े हो जाएं।
‘ब्लॉग की ख़बरें‘ की पोस्ट पर उनकी टिप्पणियों में उनकी सोच का लेवल आप ख़ुद देखिए इस लिंक पर जाकर

ब्लॉगर्स को प्रब्लेस शिखर सम्मान मुबारक हो ! Prize

 

Khushdeep Sehgal said...

दो दोस्तों ने फलों के कारोबार का फैसला किया...एक संतरे का टोकरा लेकर बैठ गया...एक केले का...दोनों ने फैसला किया सिर्फ कैश बिक्री करेंगे, उधार का कोई काम नहीं...थोड़ी देर बाद संतरे वाले को भूख लगी, उसने दो का सिक्का केले वाले को देकर केला लेकर खा लिया...केले वाले ने कहा, चलो बोहणी तो हुई...शाम तक दोनों के टोकरे खाली हो गए...पास ही संतरे और केले के छिलके के ढेर लग गए थे...दोनों ने कहा, चलो बिक्री तो बहुत बढ़िया हुई...अब कैश गिन लिया जाए...लेकिन ये क्या दोनों के पास कुल मिलाकर वो दो का सिक्का ही निकला...पूरा दिन वो एक दूसरे से कैश ले लेकर खुद ही सारे संतरे और केले चट कर गए थे....

Monday, February 20, 2012

अपनी बेटियों के सफ़ेद बाल काले कीजिए नीम से Hair care

गज़ब के लिंक्स जमा किये हैं ब्लॉगर्स मीट वीकली में.
सेहत, करिअर और ब्लॉगिंग के ताज़ा मुद्दे जैसे कि पुरस्कार वितरण.
सभी कुछ है. 
बाल काले करने का नुस्खा भी है और मर्दाना ताक़त बढ़ाने का भी.
वाह ...

future in the Homeopathy
हमारी पोस्ट शामिल करने के लिए शुक्रिया .
इस मीट का लिंक - 

ब्लॉगर्स मीट वीकली (31) Carrier in Homoeopathy

Saturday, February 18, 2012

आज का मुददा है पुरस्कार वितरण

इसका पता हमें ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ से चला।
दरअसल यह कोई मुददा ही नहीं है लेकिन इसे मुददा बना दिया है मुददा बनाने वालों ने और जब मुददा बन ही गया है तो लोगों को रस भी आने लगा है इसकी चर्चा में।
कैसे कोई बरसों लिखता रहता है और उसे पुरस्कार में मिलते हैं अपने बीवी बच्चों के ताने और कैसे कोई दूसरों के लिखे पर लिखता है लेकिन वह शोहरत के साथ दाम भी कमा लेता है।
जब दुनिया में यही हो रहा है तो फिर ब्लॉगिंग में भी यही होगा। जिसका सौदा जहां पटेगा, वह वहीं सैट हो जाएगा।
जब तक जूते सिर पर नहीं पड़े थे तो 2 जी और 3 जी वालों के भी अभिनंदन धड़ल्ले से किए जा रहे थे।
ब्लॉगिंग में भी यह सब तो होना ही है।
आखि़र सब जगह इंसान ही तो हैं।

Friday, February 17, 2012

कब्ज (कांस्टीपेशन) का इलाज.

अनियमित खान-पान के चलते लोगों में कब्ज एक आम बीमारी की तरह प्रचलित है। यह पाचन तन्त्र का प्रमुख विकार है। मनुष्यों मे मल निष्कासन की फ़्रिक्वेन्सी अलग अलग पाई जाती है। किसी को दिन में एक बार मल विसर्जन होता है तो किसी को दिन में २-३ बार होता है। कुछ लोग हफ़्ते में २ य ३ बार मल विसर्जन करते हैं। ज्यादा कठोर,गाढा और सूखा मल जिसको बाहर धकेलने के लिये जोर लगाना पडे यह कब्ज रोग का प्रमुख लक्छण है।ऐसा मल हफ़्ते में ३ से कम दफ़ा आता है और यह इस रोग का दूसरा लक्छण है। कब्ज रोगियों में पेट फ़ूलने की शिकायत भी साथ में देखने को मिलती है। यह रोग किसी व्यक्ति को किसी भी आयु में हो सकता है हो सकता है लेकिन महिलाओं और बुजुर्गों में कब्ज रोग की प्राधानता पाई जाती है।

कब्ज निवारक नुस्खे इस्तेमाल करने से कब्ज का निवारण होता है और कब्ज से होने वाले रोगों से भी बचाव हो जाता है--

१---कब्ज का मूल कारण शरीर मे तरल की कमी होना है। पानी की कमी से आंतों में मल सूख जाता है और मल निष्कासन में जोर लगाना पडता है। अत: कब्ज से परेशान रोगी को दिन मे २४ घंटे मे मौसम के मुताबिक ३ से ५ लिटर पानी पीने की आदत डालना चाहिये। इससे कब्ज रोग निवारण मे बहुत मदद मिलती है।

२...भोजन में रेशे की मात्रा ज्यादा रखने से कब्ज निवारण होता है।हरी पत्तेदार सब्जियों और फ़लों में प्रचुर रेशा पाया जाता है। मेरा सुझाव है कि अपने भोजन मे करीब ७०० ग्राम हरी शाक या फ़ल या दोनो चीजे शामिल करें।

३... सूखा भोजन ना लें। अपने भोजन में तेल और घी की मात्रा का उचित स्तर बनाये रखें। चिकनाई वाले पदार्थ से दस्त साफ़ आती है।

४..पका हुआ बिल्व फ़ल कब्ज के लिये श्रेष्ठ औषधि है। इसे पानी में उबालें। फ़िर मसलकर रस निकालकर नित्य ७ दिन तक पियें। कज मिटेगी।

५.. रात को सोते समय एक गिलास गरम दूध पियें। मल आंतों में चिपक रहा हो तो दूध में ३ -४ चम्मच केस्टर आईल (अरंडी तेल) मिलाकर पीना चाहिये।



६..इसबगोल की की भूसी कब्ज में परम हितकारी है। दूध या पानी के साथ २-३ चम्मच इसबगोल की भूसी रात को सोते वक्त लेना फ़ायदे मंद है। दस्त खुलासा होने लगता है।यह एक कुदरती रेशा है और आंतों की सक्रियता बढाता है।

७..नींबू कब्ज में गुण्कारी है। मामुली गरम जल में एक नींबू निचोडकर दिन में २-३बार पियें। जरूर लाभ होगा।

८..एक गिलास दूध में १-२ चाम्मच घी मिलाकर रात को सोते समय पीने से भी कब्ज रोग का समाधान होता है।

९...एक कप गरम जल मे १ चम्म्च शहद मिलाकर पीने से कब्ज मिटती है। यह मिश्रण दिन मे ३ बार पीना हितकर है।

१०.. जल्दी सुबह उठकर एक लिटर गरम पानी पीकर २-३ किलोमीटर घूमने जाएं। बहुत बढिया उपाय है।

११..दो सेवफ़ल प्रतिदिन खाने से कब्ज में लाभ होता है।

१२..अमरूद और पपीता ये दोनो फ़ल कब्ज रोगी के लिये अमॄत समान है। ये फ़ल दिन मे किसी भी समय खाये जा सकते हैं। इन फ़लों में पर्याप्त रेशा होता है और आंतों को शक्ति देते हैं। मल आसानी से विसर्जीत होता है।

१२..अंगूर मे कब्ज निवारण के गुण हैं । सूखे अंगूर याने किश्मिश पानी में ३ घन्टे गलाकर खाने से आंतों को ताकत मिलती है और दस्त आसानी से आती है। जब तक बाजार मे अंगूर मिलें नियमित रूप से उपयोग करते रहें।

13..एक और बढिया तरीका है। अलसी के बीज का मिक्सर में पावडर बनालें। एक गिलास पानी मे २० ग्राम के करीब यह पावडर डालें और ३-४ घन्टे तक गलने के बाद छानकर यह पानी पी जाएं। बेहद उपकारी ईलाज है।

१४.. पालक का रस या पालक कच्चा खाने से कब्ज नाश होता है। एक गिलास पालक का रस रोज पीना उत्तम है। पुरानी कब्ज भी इस सरल उपचार से मिट जाती है।

१५.. अंजीर कब्ज हरण फ़ल है। ३-४ अंजीर फ़ल रात भर पानी में गलावें। सुबह खाएं। आंतों को गतिमान कर कब्ज का निवारण होता है।

16.. मुनका में कब्ज नष्ट करने के तत्व हैं। ७ नग मुनक्का रोजाना रात को सोते वक्त लेने से कब्ज रोग का स्थाई समाधान हो जाता है।
‘जान है जहान है‘ ब्लॉग से शुक्रिया के साथ पेश है.

Wednesday, February 15, 2012

दलिद्दर दूर करने की तिलस्माती तकनीक

डा. अनवर जमाल की एक शाहकार पेशकश 


भविष्य बताने वाले और कष्ट दूर करने वाले ज्योतिषियों और बाबाओं की तिलिस्मी तकनीक

रोज़ी रोटी की तो क्या यहां हलवा पूरी की भी कोई समस्या नहीं है
नज्म सितारे को कहते हैं और नूजूमी उसे जो सितारों की चाल से वाक़िफ़ हो।
सितारों की चाल के असरात ज़मीन की आबो हवा पर तो पड़ते ही हैं। शायद इसी से लोगों ने समझा हो कि हमारी ज़िंदगी के हालात पर भी सितारों की चाल का असर पड़ता है।
कुछ हमने भी यार दोस्तों के हाथों की लकीरें देखी हैं और इसी दौरान मनोविज्ञान से भी परिचित हुए।
कोई आदमी सितारों और उनकी कुंडलियों को न भी जानता हो लेकिन वह इंसान के मनोविज्ञान को जानता हो तो वह इस देश में ऐश के साथ बसर कर सकता है।
सच बोलने वाले का यहां जीना दुश्वार है लेकिन मिथ्याभाषण करने वाला राजा की तरह सम्मान पाता है।

ख़ैर, अपने प्रयोग के दौरान हमने यह जाना है कि लोग मुसीबत में हैं और उन्हें उससे मुक्ति चाहिए। इसी तलाश में आदमी हर तरफ़ जाता है और इसी दुख से मुक्ति की तलाश में वह अपना हाथ दिखाने या अपनी कुंडली बंचवाने आएगा।
1.कुंवारी को उत्तम वर चाहिए,
2.कुंवारे को रोज़गार चाहिए, उसके लिए लड़कियां बहुत हैं।
3. शादीशुदा औरत को पुत्र चाहिए।
4. बुढ़िया को अपनी बहू अपने वश में चाहिए।
5. बीमार को शिफ़ा अर्थात आरोग्य चाहिए।

बहरहाल जिस उम्र में जो चाहिए, एक बार आप वह पहचान लीजिए। इसके बाद आप शक्ल देखकर और उसकी बात सुनकर ही भांप जाएंगे कि आपके पास आने वाले को क्या चाहिए ?
अब आप बात यों शुरू करें कि
आप दिल के बहुत अच्छे हैं। सदा दूसरों की मदद करते हैं। किसी का कभी बुरा नहीं चाहते लेकिन फिर भी लोग आपको ग़लत समझते हैं और आपको धोखा देते हैं। आप दूसरों की मदद करते हैं चाहे ख़ुद के लिए कुछ भी न बचे।
उस आदमी का विश्वास आपके प्रति अटूट हो जाएगा कि यह आदमी वास्तव में ही ज्ञानी है। यह जान गया है जैसा कि मैं वास्तव में हूं।
हक़ीक़त यह है कि हरेक आदमी अपने अंदर एक आदर्श व्यक्ति के गुण कल्पित किए हुए है। आपकी बात उसके मन के विचार की तस्दीक़ करती है और बस वह आपका मुरीद हो जाएगा। अब आप उसे कोई क्रिया या कोई जाप आदि बताते रहें जिससे समय बीतता रहे।
समय हर दर्द की दवा है।
इसे पूरा पढने का शौक़ यहाँ फ़रमाया जा सकता है :

भविष्य बताने वाले और कष्ट दूर करने वाले ज्योतिषियों और बाबाओं की तिलिस्मी तकनीक Clever Brahmins

Monday, February 6, 2012

तीन तलाक़ एक साथ देने वाले की पीठ पर कोड़े बरसाते थे इस्लामी ख़लीफ़ा

आवारगी को औरत की आजादी का नाम न दें : आलिम-ए-खवातीन
आवारगी को औरत की आजादी का नाम न दें : आलिम-ए-खवातीन
भोपाल। ताजुल मसाजिद परिसर में आयोजित दो दिनी 12वें खवातीन इज्तिमा (औरतों का सम्मेलन) का रविवार को समापन हो गया। लगभग 20 हजार खवातीन के मजमे के बीच आलिम-ए-खवातीन ने दीन पर चलने और अल्लाह के हुक्म को मानने की नसीहत देते हुए कहा कि औरतों को शरीअत और इस्लाम के साये में ही जिंदगी बसर करना चाहिए। इसमें ही उनकी भलाई है।
आखिरी और दूसरे दिन का आगाज मोहतरमा अकीका साहिबा के दर्से कुरआन से हुआ। इसके बाद मोहतरमा निदा साहिबा ने ‘आजादी और निस्बा फरेब और नारा’ पर कहा कि आवारगी को औरत की आजादी का नाम दिया जा रहा है। आजादी का ये अर्थ किसी भी तरह से कुबूल नहीं किया जा सकता कि औरत बेबाकी से मर्दो के साथ घुल मिल जाये। व्यावासायिक कारोबार के लिए उसके हुस्नों जमाल को इस्तेमाल किया जाये। आर्थिक उन्नति के नाम पर शैक्षणिक संस्थाओं में बेहयाई और सेक्स को बढ़ावा दिया जाये। मोहतरमा अनीसा साहिबा ने कहा कि इस्लामिक शिक्षा की रोशनी में औरत का लिबास ऐसा होना चाहिए कि उसका बदन पूरी तरह ढंका रहे। घर से बाहर निकलें तो अपनी ‘जीनत’ जेबर, कपड़े और चेहरा आदि को छुपा लेना चाहिए।

निकाह और तलाक का हक पर कनाडा से आए इकबाल मसूद नदवी ने कहा कि इस्लाम में निकाह के लिये जो हुक्म दिये हैं उनका उद्देश्य समाज में रिश्ते-नाते वजूद में लाना है। शरीके हयात के चुनाव में भी यह नसीहत दी गई है कि पैसा और खूबसूरती से ज्यादा सलाहित और चरित्र को महत्व दिया जाये। शादी के बाद पति-पत्नी में निभती नहीं है तो इस्लामिक तलाक का विकल्प खुला हुआ है, ताकि जिंदगी बोझ न बने, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि तलाक देने के जो तरीके शरीयत में बताये गये हैं यदि तमाम कोशिशें नाकाम हो जाती हैं तो आखिरी फैसला तलाक का है। तलाक के बाद दूसरी शादी को इस्लाम मान्यता देता है। हैदराबाद से तशरीफ लाईं नासिरा खानम ने शाम को नेकी पर कायम रहने और शरीयत और इस्लाम के हिसाब से जिंदगी गुजर करने की दुआ करते हुए मौजूद ख्वातीन हजरात को नसीहत दी। इस इज्तिमा में तकरीबन 20 हजार महिलाएं शामिल हुईं।
पूरी रिपोर्ट इस लिंक पर देखें-

आवारगी को औरत की आजादी का नाम न दें : आलिम-ए-खवातीन

एक मुश्त तीन तलाक़ देना ‘बिदअत‘ है, गुनाह है, तलाक़ का मिसयूज़ है। यह कमी मुस्लिम समाज की है न कि इस्लाम की। अल्लाह की नज़र में जायज़ चीज़ों में सबसे ज़्यादा नापसंद तलाक़ है। जीवन में बहुत से उतार-चढ़ाव आते हैं, बहुत से अलग-अलग मिज़ाजों के लोगों के सामने बहुत तरह की समस्याएं आती हैं। जब दोनों का साथ रहना मुमकिन हो और दोनों तरफ़ के लोगों के समझाने के बाद भी वे साथ रहने के लिए तैयार न हों तो फिर समाज के लिए एक सेफ़्टी वाल्व की तरह है तलाक़। तलाक़ का आदर्श तरीक़ा कुरआन में है। कुरआन की 65 वीं सूरह का नाम ही ‘सूरा ए तलाक़‘ है। तलाक़ का उससे अच्छा तरीक़ा दुनिया में किसी समाज के पास नहीं है। हिन्दू समाज में तलाक़ का कॉन्सेप्ट ही नहीं था। उसने इस्लाम से लिया है तलाक़ और पुनर्विवाह का सिद्धांत। इस्लाम को अंश रूप में स्वीकारने वाले समाज से हम यही कहते हैं कि इसे आप पूर्णरूपेण ग्रहण कीजिए। आपका मूल धर्म भी यही है।
तलाक़ का सही तरीक़ा क़ुरआन की सूरा ए तलाक़ में बता दिया गया है। एक साथ तीन तलाक़ देना क़ुरआन का तरीक़ा नहीं है। इस तरीक़े को पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद स. ने सख्त नापसंद फ़रमाया है और जो आदमी एक साथ तीन तलाक़ दिया करता था, इस्लामी ख़लीफ़ा इसे इस्लामी शरीअत के साथ खिलवाड़ मानते थे और इसे औरत का हक़ मारना समझते थे। ऐसे आदमी की पीठ पर कोड़े बरसाए जाते थे। लिहाज़ा इस्लामी ख़लीफ़ाओं के काल में तीन तलाक़ एक साथ देने की हिम्मत कोई न करता था। आज भी ऐसे लोगों की पीठ पर कोड़े बरसाए जाएं तो औरत के जज़्बात के साथ खिलवाड़ तुरंत रूक जाएगा।
औरत के जज़्बात का सबसे बड़ा रक्षक है क़ुरआन।

Saturday, February 4, 2012

मीडिया, सीबीआई और अदालत कौन ख़रीद पाया है ?

इनके बिकने का इल्ज़ाम वही लगाता है जो कि ख़ुद इन्हें न ख़रीद पाया हो, जो भी इनके बिकने का इल्ज़ाम लगाता है, वह देश के क़ानून से लोगों का भरोसा उठाने का काम करता है और देश में बग़ावत भड़काने का काम सिर्फ़ ग़ददार ही किया करते हैं।

अपने फ़र्ज़ के लिए क़त्ल होने वाले पत्रकारों की फ़ेहरिस्त लंबी है और ऐसे ही लोग सीबीआई और अदालत में भी हैं। देश से भागे हुए ग़ददार इनकी वफ़ादारी पर उंगली उठाकर दरअसल यह बता रहे हैं कि वे ख़ुद बिकाऊ माल हैं और ऐसा ही वे दूसरों के बारे में सोचते हैं।

Friday, February 3, 2012

अकबर महान क्यों नहीं ? और हिंदू मुसलमान भाई क्यों नहीं ?

जो लोग अकबर को महान कहने पर ऐतराज़ करते हैं वे भी यह मानते हैं कि हिंदू राजा महान होते हैं। एक महान हिंदू राजा में जो गुण होते हैं, उन गुणों को अकबर में देख लिया जाए कि वे गुण उसमें हैं कि नहीं, बात साफ़ हो जाएगी कि अकबर उनके समान ही या उनसे बढ़कर महान है। उसकी महानता के गुण उसके काल के ब्राह्मणों ने भी गाए हैं।
यहीं के हिंदू ऊंचनीच और छूतछात से मुक्ति पाने के लिए मुसलमान बने हैं, यह एक साबितशुदा हक़ीक़त है। इससे पता चलता है कि हिंदू और मुसलमान भाई भाई ही हैं। भाई भाई में झगड़े राम के दौर में भी हुए और कृष्ण के दौर में भी। झगड़ों की वजह से ख़ून के रिश्ते नहीं बदल जाते।
राजशाही चली गई और बादशाही भी चली गई, इसलिए नफ़रतों को भी चले जाना चाहिए।

वेद में हज़रत मुहम्मद (स.) का ज़िक्र



वेद भाष्य ऋग्वेद 1,1,2 के अन्तर्गत पं. दुर्गाशंकर महिमवत् सत्यार्थी
वेद में सरवरे कायनात स. का ज़िक्र है
स्वर्गीय आचार्य शम्स नवेद उस्मानी की प्रख्यात रचना ‘अगर अब भी न जागे तो ...‘ (प्रस्तुति: एस. अब्दुल्लाह तारिक़) ने इस संदर्भ में एक पृथकतः स्वतंत्र अध्याय पाया जाता है।
सरवरे कायनात (स.) ही इस सृष्टि का प्रारंभ हैं।

सबसे पहले मशिय्यत के अनवार से,
नक्शे रूए मुहम्मद (.) बनाया गया
फिर उसी नक्श से मांग कर रौशनी
बज़्मे कौनो मकां को सजाया गया
-मौलाना क़ासिम नानौतवी
संस्थापक दारूल उलूम देवबंद

हदीसों (= स्मृति ग्रंथों ?) से केवल इतना ही ज्ञात नहीं होता कि रसूलुल्लाह (स.) की नुबूव्वत भगवान मनु के शरीर में आत्मा डाले जाने से पहले थी, प्रत्युत हदीसों से यह भी प्रमाणित होता है कि हज़रत मुहम्मद मुज्तबा (स.) का निर्माण संपूर्ण सृष्टि, देवों, द्यावापृथिवी और अन्य सृष्टियों और परम व्योम (= मूल में ‘अर्शे इलाही‘) से भी पहले हुई थी और फिर नूरे-अहमद (स.) ही को ईशान परब्रह्म परमेश्वर ने अन्य संपूर्ण सृष्टि की उत्पत्ति का माध्यम बनाया।
(‘अगर अब भी न जागे तो ...‘ पृ. सं. 105 उर्दू से अनुवाद, दुर्गाशंकर महिमवत् सत्यार्थी।)
उक्त पुस्तक और कतिपय अन्य पुस्तकों में भी यह प्रमाणित करने के प्रयत्न किए गए हैं कि वेद में हुज़ूर स. का उल्लेख नराशंस के नाम से पाया जाता है। मेरे अपने अध्ययन के अनुसार मैं उन समस्त व्यक्तियों से क्षमा प्रार्थी हूं। जो अपने अध्ययनों द्वारा इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं। मैं यह मानता हूं, और अपने अध्ययन द्वारा इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि वेद में नराशंस शब्द से कोई व्यक्ति विशेष अभिप्रेत नहीं है। उसका अभिप्राय केवल नरों द्वारा प्रशंसित मात्र है, जिससे कहीं परम पुरूष भी अभिप्रेत है, कहीं ईशान स्वयमेव भी अभिप्रेत है और कहीं अन्य व्यक्ति भी अभिप्रेत हैं। मेरे अपने अध्ययन के अनुसार वेद में हुज़ूर स. का उल्लेख उससे कहीं अधिक उत्कृष्ट ढंग से है, जितने उत्कृष्ट ढंग से संदभिति मनीषियों द्वारा उनका उल्लेख पाया गया है -
इयं विसृष्टिर्यत आबभूव यदि वा दधे यदि वा न। यो अस्याध्यक्षः परमेव्योमन्तसो अंग वेद यदि वा वेद।
वेद 1,10,129,7
यह विविध प्रकार की सृष्टि जहां से हुई, इसे वह धारण करता है अथवा नहीं धारण करता जो इसका अध्यक्ष है परमव्योम में, वह हे अंग ! जानता है अथवा नहीं जानता।
सामान्यतः वेद भाष्यकारों ने इस मंत्र में ‘सृष्टि के अध्यक्ष‘ से ईशान परब्रह्म परमेश्वर अर्थ ग्रहण किया है, किन्तु इस मंत्र में एक बात ऐसी है जिससे यहां ‘सृष्टि के अध्यक्ष‘ से ईशान अर्थ ग्रहण नहीं किया जा सकता। वह बात यह है कि इस मंत्र में सृष्टि के अध्यक्ष के विषय में कहा गया है - ‘सो अंग ! वेद यदि वा न वेद‘ ‘वह, हे अंग ! जानता है अथवा नहीं जानता‘। ईशान के विषय में यह कल्पना भी नहीं की जा सकती कि वह कोई बात नहीं जानता। फलतः यह सर्वथा स्पष्ट है कि ईशान ने यहां सृष्टि के जिस अध्यक्ष की बात की है, वह सर्वज्ञ नहीं है। मेरे अध्ययन के अनुसार यही वेद में हुज़ूर स. का उल्लेख है। शब्द ‘नराशंस‘ का प्रयोग भी कई स्थानों पर उनके लिए हुआ है किन्तु सर्वत्र नहीं। इसी सृष्टि के अध्यक्ष का अनुवाद उर्दू में सरवरे कायनात स. किया जाता है।
फलतः श्वेताश्वतरोपनिषद के अनुसार वेद का सर्वप्रथम प्रकाश जिस पर हुआ। वह यही सृष्टि का अध्यक्ष है। जिसे इस्लाम में हुज़ूर स. का सृष्टि-पूर्व स्वरूप माना जाता है।
पूरा मज़मून यहाँ पढ़ें  :

वेद में सरवरे कायनात स. का ज़िक्र


Thursday, February 2, 2012

सतयुग कैसे आएगा ? , पर एक बहस

इस्लाम की तरफ बढ़ते रुझान से और मुसलामानों की बढ़ती तादाद से 'सतयुग' का क्या सम्बन्ध है ?
हमारी पिछली पोस्ट पर इस मौज़ू पर एक अच्छी चर्चा हुई है . 
ईश्वर सत्य है और वह एक है. उसका आदेश सबसे ऊपर होना चाहिए , सबको धर्म यही बताता है.
लोगों ने जबसे यह भुलाया है तबसे कलियुग चल रहा है.
इसे ख़त्म करने के लिए भूली हुई बात को याद करना बहुत ज़रूरी है. 
मुसलमान वही भुला दी गयी बात याद दिलाते हैं , 
देखिये इस ब्लॉग की हमारी पिछली यादगार पोस्ट :

आगे बढ़कर सत्य को मानें और दूसरों के लिए एक मिसाल बनें जैसे कि पं. श्री दुर्गाशंकर सत्यार्थी जी महाराज

Wednesday, February 1, 2012

आगे बढ़कर सत्य को मानें और दूसरों के लिए एक मिसाल बनें जैसे कि पं. श्री दुर्गाशंकर सत्यार्थी जी महाराज

ZEAL: बढती मुस्लिम आबादी एक विश्व-संकट (Muslim demographics (Europe, USA, Scandinavia) पर ग़ौरो फ़िक्र किया जाए तो कुछ बातें सामने आती हैं और जो बातें सामने आती हैं, उन्हें जानने के बाद दिल को बहुत सुकून मिलता है।
मुसलमानों की आबादी बढ़ रही है या नहीं और बढ़ रही है तो कितनी बढ़ रही है ?
इस पर आज ध्यान देने की ज़रूरत है और उससे भी ज़्यादा ज़रूरत इस बात पर देने की है कि हिंदुस्तान के पंडित और शास्त्री पहले से ही बता रहे हैं कि अब जल्दी ही सतयुग आने वाला है।
वह सतयुग इसी रूप में आएगा कि सत्य को मानने वाले ही विश्व पर छा जाएंगे।
तब क्यों न आप पहले से ही आगे बढ़कर सत्य को मानें और दूसरों के लिए एक मिसाल बनें जैसे कि पं. श्री दुर्गाशंकर सत्यार्थी जी महाराज ने भी कहा है कि
वेद और क़ुरआन हक़ीक़त में एक ही धर्म के दो ग्रंथ हैं।
इसी बात को छिपाए रखने के लिए और हिंदू और मुसलमानों को आपस में लड़ाए रखने के लिए अंग्रेज़ बहादुर ने बहुत चालाकी से काम लिया और आज तक ले रहे हैं और कम समझ नादान लोग उनके सुर में सुर मिलाए जा रहे हैं। विदेशों में बैठे हुए कुछ लोग आज भी हिंदुओं के मन में मुसलमानों के लिए नफ़रत के बीज बोते रहते हैं और उसका फ़ायदा उनके आक़ाओं को ही मिलता है।
पंडित सत्यार्थी साहब का मज़्मून ऐसी हरेक साज़िश को नाकाम कर देता है, उसे पढ़िए और उसे शेयर भी कीजिए।

वेद में सरवरे कायनात स. का ज़िक्र है Mohammad in Ved Upanishad & Quran Hadees

वस्तुतः वेद और क़ुरआन, दोनों का एक साथ अस्तित्व नास्तिकों के लिए घोर परेशानी का कारण बना हुआ है और अंग्रेज़ इस संभावना से आतंकित थे कि यदि यह रहस्य हिंदुओं और मुसलमानों पर खुल गया कि वेद और क़ुरआन, दोनों की सैद्धांतिक शिक्षाएं सर्वथा एक समान हैं और दोनों एक ही धर्म के आदि और अंतिम ग्रंथ हैं, तो हिंदुओं और मुसलमानों में वह मतैक्य संस्थापित होगा कि उन्हें हिंदुस्तान से पलायताम की स्थिति में आने के अतिरिक्त कोई और विकल्प नहीं रहेगा। यही कारण है कि अंग्रेज़ों ने वेद के बहुदेवोपास्यवादी अनुवाद कराना अपना सर्वप्रथम कार्य निश्चित किया।

मुजफ्फरनगर दंगे और देवबंद एके-47 केस

मुजफ्फरनगर दंगे और देवबंद के एके-47 केस में कोई समानता नहीं है लेकिन हाल ही के लिए गए निर्णयों में जहां मुजफ्फरनगर भीषण दंगो के केस वापस ल...