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दूसरे ब्लोगों को बकवास कहना हिन्दी ब्लोगिंग को नुकसान पहुँचाना है


सब मिल-जुल कर किसी ढंग के ब्लोगर को जर्मनी भेजने पर इत्तेफ़ाक़ कर ले। अच्छा तो यही है.
ब्लोगिंग का माज़ी (इतिहास) लिखने वाले उसका वर्तमान ख़राब कर रहे हैं. यह देखना अच्छा नहीं लगता. 
शोहरत के लिए या किसी और मकसद के लिए आदमी वह सब कर गुज़रता है जो कि नहीं करना चाहिए.
रविन्द्र परभात जी किसी ब्लॉग को अच्छा कहें तो सही है लेकिन वे या उनके हमनवा दूसरे ब्लोगों को बकवास कहने का हक नहीं रखते. उन्हें भी बहुत लोग पसंद करते हैं। दूसरे ब्लोगों को बकवास कहना हिन्दी ब्लोगिंग को नुकसान पहुँचाना है .
ईनाम के लिए  नामित एक महिला ब्लोगर कि ईमेल ने तो उनके बारे में बहुत कुछ बिना कहे कह दिया है.
यह चर्चा हो रही है इस पोस्ट की-

Ravindra Prabhat के प्रचार के पीछे ख़ुद रवीन्द्र प्रभात ही निकले ?


Comments

किसी भी ब्लॉग को बकवास कहना दुखद है इसी से कहने वाले की मानसिकता का पता चल जाता है कि वह सिर्फ कुँए का मेंडक है !!
Gyan Darpan
Shah Nawaz said…
हालाँकि मैं रविन्द्र प्रभात जी के द्वारा 'नारी' ब्लॉग पर उठाएं सवाल से सहमत नहीं हूँ, मगर मानता हूँ कि उन्हें वह सवाल उठाने का हक है...

और अगर उनकी बात गलत है तो रचना जी को उचित जवाब देना चाहिए। मगर इस बात से तल्खी का कोई भी ताल्लुक नहीं होना चाहिए। ब्लॉग जगत में वैचारिक मतभेदों से मनभेद की नौबत आना ठीक बात नहीं है।
DR. ANWER JAMAL said…
बात दरअसल यह है कि ‘बॉब्स अतंर्राष्ट्रीय पुरस्कार 2013‘ का प्लेटफ़ार्म सामने आने के बाद उनक लोगों की रोज़ी रोटी पर संकट आ खड़ा हुआ है जो हिन्दी ब्लॉगिंग पर किताबें लिखकर नोट छाप रहे थे। ये लोग ‘बिना पैसे लिए ही‘ पुरस्कार भी दिया करते थे। ये लोग हिन्दी ब्लॉगिंग के स्वयंभू ठेकेदार बनने के लिए भी बरसों से हाथ पैर मार रहे हैं।
‘बॉब्स अतंर्राष्ट्रीय पुरस्कार 2013‘ के सामने इनके पुरस्कार की हैसियत ऐसी हो गई है जैसे कि पहाड़ के सामने ऊंट जाकर खड़ा हो जाए। इस पर हुआ यह कि इन्हें रविश कुमार जी ने पूछा तक नहीं, इनमें से किसी के ब्लॉग को भी उन्होंने नहीं चुना। अब से एक साधारण ब्लॉगर की तरह अपने ऑफ़िस में बैठकर दूसरों को वोट देते रहते हैं। हर क्लिक पर उन्हें उपेक्षित होने का यही दर्द बेचैन कर रहा है कि हाय ! किताबें हमने लिखीं और चुने वे गए जिन्होंने कोई किताब न लिखी। इसीलिए वे हिन्दी ब्लॉगिंग पर अंग्रेज़ी में इंटरव्यू दे रहे हैं।
...कि शायद ऐसा करके ही मैं रविश जी की नज़र में आ जाऊं कि मैं भी कुछ हूं और शायद अगली बार शायद वह मुझे या मेरे ब्लॉग को किसी लायक़ समझ लें।
इसीलिए दूसरे ब्लॉगर्स के बारे में अनाप शनाप बकवास की जा रही है।
ये ब्लॉगर्स एक भयानक मानसिक कष्ट से गुज़र रहे हैं। हम सबको उनसे हमदर्दी रखनी चाहिए।
आपके विचार को ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ की ज़ीनत बनाया गया है। देखिए यह लिंक
http://blogkikhabren.blogspot.in/2013/04/bakwas.html
रचना said…
shah nawaj ji

maenae kisi kae adihkaar par koi prashn kab lagayaa

unhonae new paper mae interview diya
maenae new paper editor koi mail bhej kar aaptti darj karvaa di
[ ab mujhae aaptti kaese darj karwaani haen , kin shabdo me karvaani haen KYAA YAE MUJHAE KISI SAE SIKHNA HAEN ,aaptti darj karwana mera bhi adhikaar aur apnae tarikae sae karwaana bhi mera adhikaar haen }

news paper nae aaptti ravindra prabhat tak pahuchaa di

unhonae us patr kae content ko tod madod kar kae paesh kar diyaa

santosh trivedi ne naari ki asliyat par post likh dii

aur mare upar maan haani kaa davaa karnae ki baat shuru ho gayii

iskae baad new paper editor ne mujhae patr likha ki mujae ravindra prabhat sae maafi maang laeni chahiyae

maenae unko likh diya PLEASE DONT THREATN ME

newpaper kaa domain trace karkae jo jaankari maenae uplabhd karaa dii us par FARZI KAMNET AYAA HAEN

ravindra prabhat ki pehli parikalpna post jo shyaad blogspot par thee aur wahaan 25 blogs selected they mera kament thaa

INKO HINDI KAE BEST BLOG NAA KAHEY APNII PASAND KAHEY

aur mae aaj bhi apne byaan par kayam hun

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