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Showing posts from 2017

सड़क पर न्याय

आज कल सड़क पर न्याय करने की ग्रंथि भारत में खूब विकसित हुई है। इस ग्रन्थि का शिकार अधिकतर अल्पसंख्यक, सरकार के राजनैतिक विरोधी वैचारिक विरोधी अफ्रीकी देशों के काले लोग दूसरे राज्य के मजदूर, दलित व आदिवासी आदि लोग होते हैं।
सड़क पर न्याय करने वाले ज्यादातर संगठित लोग होते हैं, इसके अलावा कभी कभी अंसगठित लोग भी किसी अफवाह या घटना की प्रतिक्रिया में शामिल हो जाते हैं।
देश मंे इस समय बहुत सारे संगठन कुकरमुत्तों की तरह उग गए है। पहले ये संगठन प्रेस विज्ञप्ती से किसी समस्या की निंदा कर लेते थे या फिर धरना ज्ञापन आदि में लगे रहते थे। परन्तु समय के साथ-साथ बाद इन संगठनों ने कानून हाथ में ले लिया और लगे सड़क पर न्याय करने।
हालंाकि इस न्याय व्यवस्था ने इस संगठन का साथ स्थानीय सरकारें भी देती है। क्यांेकि सरकार की ओर से इन संगठनों की कार्यवाही का भय नही होता इसलिए ये संगठन रात दिन तरक्की करते हैं इस समय इस तरह की न्याय व्यवस्था कायम करने वालों के पास सबसे बड़ा मुददा गोहत्या है। इसी मुददे को लेकर सबसे ज्यादा सड़क पर न्याय हो रहा है। और जहां तहां लोग इस का शिकार हो रहे हैं। पिछले  दिनों 6 अगस्त 2016 को प्…

चुनाव के बाद हालात और हल

यू.पी. चुनाव में मिले भाजपा को प्रचंड बहुमत के कारण आज मुसलमान सकते की हालत में हैं। क्योंकि मुसलमानों ने वोट भाजपा को हराने के लिए दिया था, मगर हुआ उल्टा भाजपा को हराना तो दूर उल्टे यू.पी. विधान सभा में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व भी कम हो गया। उलेमा और बुद्धिजीवियों की सारी अपीलें बेकार हो गई और मुसलमानों का वोट तकरीबन हर मुस्लिम बाहुल सीट पर और अन्य सीटों पर दो जगह या की कहीं कहीं तीन जगह बंट गया।
मुसलमानों की संख्या भारत में 20 प्रतिशत के आस पास है जिसमें पश्चिमी यू0पी0 में तकरीबन 35 प्रतिशत के करीब है। मगर वहां भी मुसलमानों को कोई ज्यादा फायदा नही मिला।
सपा व बसपा दो पार्टियों ने यूपी मंे बारी-बारी सरकार बनाई लेकिन आज की तारीख में सपा के पास मुसलमानों और 5- 7 प्रतिशत यादवों के अलावा कोई दूसरा वोट बैंक नही है। इसी तरह बसपा के पास जाटवों के अलावा कोई वोट बैंक नही बचा। कांग्रेस तो है ही डूबता जाहज़।
मायावती ने पिछली बार अपनी हार का कारण मुसलमानों की गददारी बताया था इस बार वो ईवीएम मशीन को दोष दे रहीं हैं।
सपा व कांग्रेस ने मुसलमानों को दोष नही दिया लेकिन सुगबुगाहट उसमे भी है। लेकिन अगर हम…

नास्तिक और आस्तिक :साजिद हसन

संसार में देखने में दो तरह के लोग मिलते हैं, आस्तिक और नास्तिक। नास्तिक का दृष्टिकोण बिल्कुल स्पष्ट होता है। वह कहता है नहीं है, कोई ईश्वर नहीं है। वह उसी दृष्टिकोण से संसार में कार्य भी करता है। हांलाकि समय-समय पर ईश्वर  की सत्ता का उसे आभास भी होता है। परन्तु नास्तिक इन आभासों को संयोग या अपवाद का नाम देकर अपनी आस्था और दृष्टिकोण पर टिका रहता है। वह अपना एक दृष्टिकोण रखता है कि ईश्वर नहीं है।
जबकि  आस्तिक यह कहता है कि मालिक है। यही नहीं वह दिल से यह मानता है कि मालिक एक है। परन्तु जैसे ही वह ज़िन्दगी के मुश्किल हालातों से दो चार होता है। आस्था बदलने लगती है। अपनी कठिनाईयों और कष्टों को दूर करने के लिए उसे जहां जो हल नज़र आता है, वह वहां दौड़ पड़ता है। यह बिखरा हुआ मनुष्य बहुत से मालिकों को मानने लगता है। उसकी जो समस्या जहां से दूर हो, वही उसका देवता, उसका मालिक बन जाता है। ऐसे मनुष्य एक से हटकर बहुत से मालिकों की तरफ चला जाता है और यह क्रम बढ़ता हुआ, उसके करीब के लोगों को भी प्रभाव में ले लेता है। कुछ सामाजिक प्रभाव ऐसे होते हैं जो धर्म को, सत्य को भी तोड़-मरोड़ डालते हैं।
धर्म का स्…

अपने- अपने नारे

                                          केवल यही दुआ है दिल से, सबका घर आबाद रहे 
                                          बटन दबाने से पहले सबको बगांल कैराना याद रहे
चुनाव के दिनो में बहुत सारे नारे सुनने को मिले आजकल सोशल मिडिया के दौरे में नारों का आदान प्रदान बहुत आसान हो गया है लोग सोषल मिडिया से ही पार्टी और प्रत्याशी  का प्रचार कर रहें है ऊपर लिखा नारा हमरे एक निकटतम दोस्त ने भेजा जो की धर्म से हिन्दु है लेकिन हमारी दोस्ती के बीच धर्म आडे नही आता इस नारे से जहा एक ओर दुआ दी गई है दुसरी और भाजपा द्वारा उठाए गए पलायन के ;कैरानाद्ध मुद्दे को भी दर्शाया गया। साफ है कि यह नारा भाजपा के पक्ष में है इसमे बहुसंख्यको को अल्पसख्ंयको से डराया गया है और उन्हें एहसास दिलाया गया है कि देश मे हिन्दु खतरे में है और अगर हमे वोट न दिया तो सारे देश में ही हिन्दुओ का पलायन होगा इसी तरह का माहौल पिछले दिनों बनया गया था जब भी कोई चुनाव आता है तो इस तरह के नारे सिर्फ एक पक्ष की और से ही नही दिये जाते है अपुति ऐसे नारे तो सभी पार्टियाँ वोटरो को अपनी ओर करने के लिए देती है आज के दौर जब किसी बात या अफव…

बालों में खुश्की के कारण : बचाव व् इलाज

बालों की देखभाल न करने से कई तरह की परेशानियां खड़ी हो जाती है। इनमें से एक है डैंड्रफ यानी रूसी, जो खुश्की और बालों में रूखेपन की वजह से होती है लेकिन बालों की थोड़ी सी देखभाल से आप न सिर्फ बालों की समस्याओं का समाधान कर सकते हैं साथ ही डेंड्रफ से भी छुटकारा पा सकते हैं। रूसी में आयुर्वेद से इलाज बहुत अच्छा रहता है। आइए जानें आयुर्वेद के अनुसार रूसी दूर करने के लिए क्या करना  पड़ता है
बालों में खुश्की के कारण तनाव का अधिक होना फंगल इन्फेक्शन का होना

बालों में अधिक पसीने के कारण
बालों को आवश्यक पोषक तत्वों का ना मिलना
बालों की सफाई (हेयर केयर) का ध्यान न रखने से।
हारमोंस इम्बेलेंस के कारण भी ये समस्या हो सकती है।



बालों से रूसी का कैसे करें सफाया?
नारियल के तेल में निम्बू का रस पकाकर रोजाना सर की मालिश करें
पानी में भीगी मूंग को पीसकर नहाते समय शेम्पू की जगह प्रयोग करें
मूंग पावडर में दही मिक्स करके सर पर एक घंटा लगाकर धो दें
रीठा पानी में मसलकर उससे सर धोएं
 मांसाहार कम करे पूर्ण शाकाहारी भोजन का प्रयोग भी आपकी सर की रूसी दूर करने में सहायक होगा


रूसी दूर करने के देसी और आयुर्वेदिक नु…